
भारत और स्विटजरलैंड ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं जिसके तहत कर चोरी करने वालों से संबंधित सूचना का आदान प्रदान किया जाएगा। स्विटजरलैंड के बैंकों में जमा भारतीयों की बेहिसाब संपत्ती का पता लगाने के लिए यह समझौता जरूरी था। इस समझौते के तहत दोहरे कराधान से बचने संबंधी मौजूदा प्रावधान में भी संशोधन किए गए हैं। समझौते पर कल नई दिल्ली में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी और स्विटजरलैंड की विदेशमंत्री मिशलीन कैमी रे ने हस्ताक्षर किए। सूचना का आदान-प्रदान अंतर्राष्ट्रीय कर मानक तय करने वाले आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के नियमों पर आधारित होगा। सरकार ने वायदा किया था कि वह बेहिसाब पैसे को वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। माना जाता है कि कई भारतीयों के अरबों रुपये स्विटजरलैंड के बैंकों में जमा हैं।विदेश मंत्रालय में केंद्रीय यूरोप विभाग की संयुक्त सचिव बनश्री बोस के शब्दों में, 'नया समझौता अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग व विकास संगठन के ढांचे के अनुरूप है। नए समझौते की शर्ते वही हैं, जो स्विट्जरलैंड की अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ हैं।' स्विट्जरलैंड में वित्तीय सेवाएं एक बड़ा क्षेत्र है और उसके सकल घरेलू उत्पाद का 11 फीसदी हिस्सा बैंकिंग सेवाओं से आता है। स्विस खेमे के मुताबिक, नया समझौता जनवरी 2011 से लागू होगा।






