
अमेरिकी अखबार 'वाल स्ट्रीट जरनल' के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपने देश के लिए खतरे के क्रम में परिवर्तन कर दिया है। पिछले 63 साल से पाकिस्तान भारत को सबसे बड़ा खतरा मानता आ रहा है, जबकि अब उसने घरेलू आतंक को सबसे बड़े खतरे के रूप में स्वीकार कर लिया है। इसे पाकिस्तान की सोच में क्रांतिकारी बदलाव कहा जा सकता है। इस रिपोर्ट पर पाकिस्तान में अधिक ध्यान नहीं दिया गया है, जबकि भारत के मीडिया ने इसे प्रमुख स्थान दिया है। इसमें संदेह नहीं है कि आने वाले दिनों में इसका आधिकारिक और गैर-आधिकारिक दोनों रूपों में मूल्यांकन होगा। अगर यह रिपोर्ट सही है तो यह राजनीतिक, कूटनीतिक और खुफिया स्तर पर ध्यान अपनी ओर खींचेगी। दुनिया इससे अवगत है कि पाकिस्तान में भयावह बाढ़ का कहर जारी है, किंतु उसे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की ओर से पर्याप्त सहायता राशि नहीं मिल पा रही है। दरअसल अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान की नकारात्मक छवि बनी हुई है कि यहां की सरकार ही आतंकवाद को पोषित कर रही है और पाक सेना का हाथ आतंकवादी समूहों के सिर पर है। इसी कारण पाकिस्तान को सहायता देने की अपील पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं हुई है। हाल ही में विकिलीक्स के खुलासे ने पाकिस्तानी सेना और आतंकी संगठनों के बीच साठगांठ की पुष्टि की है, जिसके कारण अफगानिस्तान में अमेरिकी और नाटो सेनाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पाकिस्तान को सहायता देने के मुद्दे पर जल्द ही कैरी-लूगर विधेयक अमेरिकी संसद में पेश होना है। अगले माह ही संयुक्त राष्ट्र की महासभा भी आयोजित होनी है। इसमें अमेरिका की कोशिश रहेगी कि पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ितों के लिए अधिक से अधिक राहत राशि जुटा ली जाए। पाकिस्तानी सेना धोखाधड़ी करने वाली संस्था के रूप में कुख्यात हो चुकी है। पाकिस्तान अफगान युद्ध में सहयोग देने के नाम पर अमेरिका को पिछले आठ साल से बेवकूफ बना रहा है, जबकि इस बीच वह आतंकवादी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराता रहा है।






