आतंकवादियों ने अपना ध्यान कश्मीर घाटी से बाहर भी केंद्रित करना शुरू कर दिया है । अब वह सांप्रदायिक तनाव फैलाने के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को भी निशाना बना रहे हैं । यह बात मुंबई हमलों की पूर्व संध्या पर गृह मंत्रालय ने कही ।आतंकवाद के ‘‘घृणित स्वरूपों’’ से मुकाबला करने के लिए किए गए उपायों की विस्तृत जानकारी देते हुए सरकार ने आज कहा, ‘‘आतंकवादियों का फोकस बदल गया है और उनका निशाना कश्मीर घाटी के अलावा देश के अन्य हिस्सों की ओर भी है । इसका दोहरा उद्देश्य देश के सांप्रदायिक सौहाद्र्र और आर्थिक हितों को अस्थिर करना है।’’ गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘आज हमें जिन आतंकवादी संगठनों से चुनौती मिल रही है वह न सिर्फ आधुनिक तकनीक से लैस और वित्तपोषित हैं बल्कि उनको विभिन्न बाहरी एजेंसियों से समर्थन मिल रहा है ।’’ खुफिया सूचनाओं को एकत्र करने और उनको साझा करने के उद्देश्य से इंटेलिजेंस ब्यूरो की क्षमता बढ़ाई गई है और आईबी में मल्टी एजेंसी सेंटर को मजबूत एवं पुनर्व्यवस्थित किया गया है ताकि वह सातों दिन चौबीसों घंटे काम करे।
मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) ने अन्य सभी एजेंसियों के साथ खुफिया सूचनाएँ साझा की हैं, जिनमें राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार भी शामिल हैं। इसी तरह अन्य सभी एजेंसियों ने भी एमएसी के साथ खुफिया सूचनाएँ साझा की हैं। इसी तरह एमएसी के सभी सदस्यों के बीच प्रतिबद्ध एवं सुरक्षित कनेक्टिविटी के लिए ऑनलाइन की व्यवस्था की जा रही है। यह पूरे देश में 30 महत्वपूर्ण स्थानों पर एमएसी एवं इसके सहायक एमएसी के बीच होगा। इसमें राज्य की विशेष शाखाएँ भी जुड़ेंगी।सरकार ने हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एनएसजी के चार केंद्र बनाए हैं। प्रत्येक केंद्र में करीब ढाई सौ कर्मचारी हैं। सरकार ने हैदराबाद और कोलकाता में एनएसजी के दो क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना करने का भी निर्णय किया है ताकि देश के किसी भी हिस्से में आतंकवादी घटना होने पर वह त्वरित कार्रवाई कर सकें।26/11 के हमले के बाद विभिन्न स्तरों पर तटीय सुरक्षा की समीक्षा की गई है। तटीय सुरक्षा स्कीम के तहत 73 तटीय पुलिस थानों में से 64 ने काम करना शुरू कर दिया है। तटीय राज्यों एवं केंद्र शासित राज्यों में अब तक 47 इंटरसेप्टर नाव उपलब्ध कराया गया है। मार्च 2010 तक इनकी संख्या बढ़कर 126 हो जाएँगी।