चीन-पाक का गठजोड़ खतरनाक

Saturday, 28 November 2009 09:32 administrator
Print
User Rating: / 0
PoorBest 

चीन-पाक का गठजोड़ खतरनाक भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य गठजोड़ पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि इसके चलते देश को हर वक्त सतर्क रहना होगा। रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने कहा है कि हमें चीन की रक्षा क्षमताओं का लगातार मूल्यांकन करना होगा और अपनी जवाबी तैयारियों को उसी अनुरूप आकार देना होगा। साथ ही, हमें हर समय चौकस रहने की जरूरत है। रक्षा मंत्री ने यहां रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत महसूस करता है कि चीन-पाकिस्तान सैन्य गठजोड़ उसके हितों और दक्षिण एशिया क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन के लिए हानिकारक है। भारत के लिए चिंता का एक और सबब पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए चीन द्वारा साजो-सामान और तकनीक का ट्रांसफर किया जाना है। चीन ने पाकिस्तान को पंजाब प्रांत में दो न्यूक्लियर रिएक्टरों के निर्माण में मदद की है और वह अब भी लगातार उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम में सहायता पहुंचा रहा है। पाक को हथियारों की सप्लाई करने वाला चीन सबसे बड़ा देश है। इन हथियारों में कम दूरी की बलिस्टिक मिसाइलें, लड़ाकू मिसाइलें, हेलिकॉप्टरों के साथ फ्रिगेट्स, टी-85 टैंक, जेट ट्रेनर के अलावा अन्य हथियार व गोलाबारूद शामिल हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि चीन परस्पर विश्वास और समझ कायम करने की दिशा में की गई भारत की पहल का उचित जवाब देगा। भारत चीन समेत अपने सभी पड़ोसियों के साथ दोस्ताना और मधुर रिश्ते चाहता है। इस दिशा में हमारी कोशिशें जारी हैं।

रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अपनी जमीन से काम कर रहे आतंकवादी समूहों को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा। भारत को पाकिस्तान में हो रही गतिविधियों पर नजदीकी निगाह रखने की जरूरत है। पाक में आतंक का ताना-बाना अब भी बरकरार है और वास्तव में वह फल-फूल रहा है। पाकिस्तान ने आतंकवादियों और अंतरराष्ट्रीय अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए अब तक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है। एंटनी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू किए जाने की इच्छा प्रकट किए जाने को क्षेत्र में शांति बहाल करने की भारत की इच्छा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। एंटनी ने परमाणु क्षमता से लैस मध्यम दूरी तक मार करने वाली अगिन्-2 मिसाइल का हाल ही में परीक्षण विफल होने को कम करके आंकते हुए कहा कि वैज्ञानिक बहुत जल्द इसकी खामियां सुधार देंगे। एंटनी से पूछा गया कि यह विफलता देश के मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए आघात है, तो उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह सही नहीं है। कई बार परीक्षण नाकाम हो जाते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अगले महीने रूस दौरे के दौरान विमान वाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव की खरीद के लिए संशोधित सौदा होने की संभावना नहीं है।


Comments
Add New Search
+/-
Write comment
Name:
Email:
 
Title:
 
Please input the anti-spam code that you can read in the image.

3.26 Copyright (C) 2008 Compojoom.com / Copyright (C) 2007 Alain Georgette / Copyright (C) 2006 Frantisek Hliva. All rights reserved."

 
Author of this article: Administrator