भारत और रूस नए असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह और रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव की शिखर बैठक के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार इससे भारत को रूस से यूरेनियम ईंधन की अपूर्ति बिना किसी बाधा के सुनिश्चित हो सकेगी। तीन दिन की रूस यात्रा के दौरान डॉक्टर मनमोहन सिंह रूस के साथ रक्षा के क्षेत्र में भी तीन समझौते करेंगे। उनकी रूस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ होने वाली बातचीत से दोनों देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। डॉक्टर मनमोहन सिंह भारत-रूस मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की परिषद् के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। वे श्री मेदवेदव के साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे, जिनमें आतंकवाद, वैश्विक मंदी से निपटने के उपाय, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, परमाणु निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इस बीच रक्षा के क्षेत्र में भारत और रूस के बीच सहयोग एक लम्बी अवधि तक हमारे बीच संबंधों का आधार रहा है भारत में रक्षा उद्योग का विकास रूस और पुरू के सोवियत यूनियन के साथ हमारे मजबूत संबंधों की तरह संभव हो सका। कल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूस के राष्ट्रपति मेदवेदेव तथा प्रधानमंत्री पुतिन के बीच होने वाली बैठकों में इन संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में चर्चा होगी। डॉ. मनमोहन सिंह और रूस के प्रधानमंत्री व्लादीमिर पुतिन सोमवार को भारत-रूस वर्ष के समापन समारोह में शामिल होंगे। कल विदेश सचिव निरूपमा राव ने संवाददाताओं को बताया कि भारत और रूस के संबंधों का मुख्य आधार रक्षा सहयोग रहा है और दोनों देश खरीदार-विक्रेता संबंध से काफी आगे बढ़ चुके हैं। विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देश अब प्रौद्योगिकी का मिलकर उत्पादन कर रहे हैं। राव ने यह भी कहा कि भारत के साथ रूस के मैत्रीपूर्ण संबंध विपरीत परिस्थितियों में भी खरे उतरे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
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