वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से अत्यधिक चिंतित है और केंद्र तथा राज्य सरकारों को स्थिति पर नियंत्रण के लिए मिलकर काम करना होगा। लोकसभा में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि पर हुई बहस में हस्तक्षेप करते हुए मुखर्जी ने कहा कि केंद्र ने मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिए मौद्रिक उपाय किए हैं। उसने सभी आवश्यक वस्तुओं के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया है। वित्तमंत्री ने कहा है कि आवश्यकत वस्तुओं, कच्चे माल और पेट्रोलियम पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि तथा वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण देश में मुद्रास्फीति बढ़ी है। इससे पहले विभिन्न पार्टियों के सदस्यों ने आवश्यक वस्तुओं, विशेष रूप से खाद्य सामग्री की कीमतों में भारी वृद्धि के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की।
इससे पहले बहस की शुरुआत करते हुए जेडीयू के राजीव रंजन सिंह ललन ने कहा कि महंगाई सारी सीमाओं को पार कर गई है। उन्होंने महंगाई के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराते हुए कहा कि सरकार की चिंता सिर्फ जीडीपी है। ललन ने सरकार की एक्सपोर्ट पॉलिसी की आलोचना करते हुए कहा कि पहले चीनी और अन्य चीजों को एक्सपोर्ट किया गया और फिर कमी बताकर उन्हें ही इंपोर्ट किया गया। उन्होंने कहा कि चीनी इस समय 40 रुपये किलो बिक रही है, जबकि पिछले साल इसके दाम 18 रुपये किलो थे। एसपी के मुलायम सिंह यादव ने कहा कि देश की एक चौथाई धन-संपत्ति पर सौ परिवारों ने कब्जा कर रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि गन्ना सस्ता है और चीनी महंगी। कथित अर्थशास्त्रियों ने देश को बर्बाद कर दिया। बीएसपी के दारा सिंह चौहान ने जमाखोरों पर नकेल कसने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर महंगाई बढ़ा रहे हैं। कांग्रेस की तरफ से अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि जमाखोरों और कालाबाजारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी राज्यों सरकारों की है। बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि एनडीए के शासनकाल में जबर्दस्त सूखा पड़ा था, मगर महंगाई को नहीं बढ़ने दिया गया।
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