विश्व बैंक ने कहा है कि अगले दो वर्षों में भारत आठ से नौ प्रतिशत आर्थिक विकास दर पर लौट सकता है। नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जिऑलिक ने कहा कि भारत को निरन्तर विकास के लिए बुनियादी ढांचे में और निवेश करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत संकट प्रबन्धन क्षमता और सतत वैश्विक मांग ने दुनिया को आर्थिक संकट से उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिऑलिक ने कहा कि भारत, अपनी मजबूत राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के कारण निर्यात में आई गिरावट का सामना कर सका है। इसके अलावा वह खाद्य, ईंधन और वित्तीय संकट के बाहरी दबावों का भी मुकाबला कर सका है। विश्व बैंक भारत को चालू वित्त वर्ष में बिजली, सड़कों, बैंकिंग और ग्रामीण विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए लगभग पांच अरब, 30 करोड़ डॉलर की सहायता पहले ही दे चुका है।
इस बीच विश्व आर्थिक संकट के बावजूद अक्टूबर में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 56प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई और यह दो अरब तीस करोड़ डालर हो गया। एक साल पहले यह डेढ़ अरब डालर था। वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में देश में करीब 18 अरब डालर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ।चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सात दशमलव नौ प्रतिशत की आर्थिक विकास दर को देखते हुए वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने आशा व्यक्त की कि अक्टूबर से मार्च तक की अवधि में आर्थिक विकास दर अच्छी रहेगी। उन्होंने नई दिल्ली में कहा कि फिर से नौ प्रतिशत की विकास दर हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती है।इससे पहले, प्रधानमंत्री की सलाहकार परिषद ने इस वित्त वर्ष की विकास दर का लक्ष्य साढ़े छह से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। परिषद के अध्यक्ष डॉक्टर सी० रंगराजन ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में विकास दर सात से आठ प्रतिशत रहेगी जो उससे अगले साल बढ़कर नौ प्रतिशत हो जाएगी। उन्होंने राजकोषीय घाटे में कमी लाने पर जोर दिया।