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अयोध्या को 'नो फ्लाइंग जोन' घोषित कराने की कवायद

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अयोध्या को 'नो फ्लाइंग जोन' अयोध्या के अधिग्रहीत राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा कवच मजबूत करने की कवा यद सरकारी स्तर पर जारी है। मुंबई की आतंकी घटनाओं के बाद सुरक्षा के मामले में प्रशासन किसी तरह का 'लूपहोल' नहीं छोड़ना चाहता। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि आतंकवादी हवाई हमला भी कर सकते हैं। इस चेतावनी के तहत क्षेत्र को हवाई आतंकी हमले से बचाने की व्यवस्था की जा रही है। अयोध्या को 'नो फ्लाइंग जोन' घोषित कराने के लिए सरकारी स्तर पर लिखापढ़ी चल रही है। अयोध्या के शेषावतार मंदिर के पास टावर पर सीआरपी के जवान आसमान की ओर बंदूकें ताने ड्यूटी दे रहे हैं।

वर्तमान व्यवस्था के बाद अब केवल 'रियल अटैक' का खतरा बरकरार है, जिसकी फिलहाल तात्कालिक व्यवस्था कर दी गई है। फिलहाल पूरी कवायद अयोध्या को 'नो फ्लाइंग जोन' घोषित कराने की है। ऐसा होने पर अधिग्रहीत परिसर के क्षेत्र में आने वाले हवाई जहाज को सीधे मार गिराने का अधिकार सुरक्षा अधिकारियों को हो जाएगा। बताया गया है कि अयोध्या का 'रेड जोन', जो विवादित परिसर का 2.77 एकड़ क्षेत्र है, केंद्रीय सुरक्षा बलों से लैस है। इसके बाहरी क्षेत्र को 'यलो जोन' कहा जाता है, जिसमें चार कंपनी से ज्यादा पुलिस तैनात किए गए हैं। सीसी कैमरे, वॉच टावर, लाइव टावर व छोटी बुलेट प्रूफ गाड़ियों की व्यवस्था भी सुरक्षा के मद्देनजर की जा रही है। इस क्षेत्र में प्रवेश के पूर्व व्यापक तलाशी से होकर गुजरना पड़ता है।

इस बीच, सरकारी सूत्रों ने खबर दी है कि साल 2005 में रामजन्म भूमि परिसर पर आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने इसकी सुरक्षा का जो हाइटेक प्लान तैयार किया था, उसे पूरा कराने के प्रयास भी तेज किए गए हैं। सुरक्षा कवच फिलहाल काफी पुख्ता है और दो कंपनी अतिरिक्त सुरक्षा जवान तैनात कर दिए गए हैं। विवादित परिसर के रेड व यलो जोन को अभेद्य दुर्ग की तरह बना दिया गया है, जिसमें कोई आतंकी प्रवेश करके आगे नहीं बढ़ पाएगा। सुरक्षा में लगे जवान उन्हें पहले ही ढेर कर देंगे।


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