राज्यसभा में लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पर गर्मागर्म बहस के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। भाजपा के अरुण जेटली ने इस रिपोर्ट को अविश्वसनीय और गलतियों का पुलिंदा बताया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह भी इस मामले में अपने को निर्दोष नहीं कह सकती, क्योंकि उस समय केंद्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली के निशाने पर थी। जेटली ने तर्को व तथ्यों के सहारे आयोग की रिपोर्ट का पोस्टमार्टम करते हुए सरकार को कई तरह के सवालों में घेर दिया। रिपोर्ट को 'एक राष्ट्रीय मजाक' करार देते जेटली ने सरकार को उसके अपने ही तथ्यों में फंसा दिया जो कि विवादित स्थान पर अतीत में मंदिर होने का इशारा करते हैं। लगभग एक घंटे के धारदार संबोधन में जेटली ने कहा कि सरकार ने आयोग की यह सिफारिश खारिज कर दी है कि अयोध्या में विवादित स्थल के इतिहास को निर्धारित करने के लिए आयोग बनाया जाए। सरकार का तर्क है कि यह काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का है। जेटली ने कहा, एएसआई तो इलाहाबाद हाई कोर्ट को अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि विवादित स्थल से मिले भग्नावशेष मंदिर के थे। जीपीएआरएस सर्वे से भी ऐसे तथ्य मिले हैं।
जेटली ने लिब्रहान आयोग व उसकी रिपोर्ट को हास्यास्पद गलतियों का पिटारा साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उनका कहना था इसकी सिफारिशें आयोग के कार्यक्षेत्र से बाहर की हैं। आयोग ने तो संविधान की समीक्षा, नौकरशाहों की नियुक्ति, पत्रकारों को पत्रकारिता का लाइसेंस देने जैसी बेसिर पैर की सिफारिशें की हैं। शायद इसीलिए सिफारिशें सरकार को हजम नहीं हुई हैं। उनका सवाल था कि सरकार को यह बताना चाहिए कि यह रिपोर्ट किसने लिखी है? न इसकी भाषा न्यायिक है और न तथ्यसंगत। यह रिपोर्ट तो राजनीति, इतिहास पर टिप्पणियां करती है जो आयोग के कार्यक्षेत्र से बाहर है। उन्होंने रिपोर्ट के लीक होने को भी उतना ही संदिग्ध बताया, जितनी इसकी सामग्री है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट ऐसे किसी सवाल का जवाब नहीं दे सकी जो इस ढांचे के ढहने के संदर्भ में इसे सौंपे गए थे। भाजपा नेता ने लिब्रहान के निष्कर्षों की खबर लेते हुए कहा कि 'आयोग एक जांचकर्ता है, राजनीतिक पंडित नहीं। न्यायाधीश ने पूरे साक्ष्यों की उपेक्षा की है और निष्कर्ष दे दिया।' उन्होंने तथ्य जुटाने की पूरी प्रकिया पर भी गहरे सवाल उठाए। रिपोर्ट में तथ्यात्मक गलतियों की भरमार होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें महात्मा गांधी की हत्या की तारीख गलत बताई गई है। गुलजारी लाल नंदा, देवराहा बाबा व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नामों को लाने की आयोग की मंशा पर उनके गहरे सवाल थे। उन्होंने लिब्रहान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानों वह सेवानिवृत्ति के बाद 'खुद अपने रोजगार' के लिए 17 साल तक जुटे रहे।उधर, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने भाजपा और संघ परिवार पर आरोप लगाया कि उन्होंने ढांचा गिराने के लिए सुनियोजित रुप से साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देश इससे सबक ले और भविष्य के बारे में सोचे।मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी ने ढांचा गिराने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को जिम्मेदार ठहराया। इससे पहले इस मुद्दे पर लोकसभा में दो दिन तक चर्चा हुई। गृहमंत्री आज सदन में बहस का जवाब देंगे।