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वंदेमातरम से परहेज क्यों: बाबा रामदेव

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वंदेमातरम से परहेज क्योंयोगाचार्य स्वामी रामदेव ने कहा है कि वंदेमातरम् किसी प्रकार की पूजा पाठ की प्रक्रिया नहीं, मातृभूमि एवं जन्मभूमि के प्रति एक देशभक्त नागरिक का अपने वतन को सलाम है। वंदेमातरम् का शाब्दिक अर्थ है मां को सलाम। स्वामी रामदेव ने राष्ट्रीय गीत पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया '' वंदेमातरम् गाकर एक नागरिक अपने वतन को अपना सर्वस्व मानकर उस पर अपनी कुर्बानी या शहादत देने का संकल्प लेता है। इससे अपने राष्ट्रप्रेम का इजहार कर गर्व0 की अनुभूति करता है। '' उन्होंने कहा '' आजादी के संघर्ष में चाहे हिंदू हो या मुसलमान सब ने समान रूप से स्वाधीनता के नारे के रूप में वंदेमातरम् का उद्घोष किया और शहीदों के सपनों को पूरा कर मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त किया। इसमें कहीं भी मूर्ति पूजा जैसा कर्मकांड नहीं है। ''इस बीच जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमणियन स्वामी ने कहा कि मुस्लिमों को जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से पारित उस प्रस्ताव की निंदा करनी चाहिए, जिसमें समुदाय से वंदे मातरम् नहीं गाने को कहा गया है।स्वामी ने वक्तव्य में कहा, ‘‘देवबंद मदरसे में हुए समारोह में मुस्लिमों को वंदे मातरम् खारिज करने के निर्देश देते फतवे की प्रकृति में आए प्रस्ताव का पारित होना संविधान का उल्लंघन है और इसके लिए भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।’’ उन्होंने कहा वह चाहते हैं कि मुस्लिम नेता प्रस्ताव की निंदा करें और राष्ट्र तथा उसके संविधान को मजहब से ऊपर रखें।जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने देवबंद में हुए सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर समुदाय के सदस्यों से वंदे मातरम् नहीं गाने को कहा और दारूल उलूम मदरसे के इस गीत से जुड़ी किसी भी तरह की प्रार्थना के विरोध में आए फतवे का समर्थन किया। संगठन की 30वीं आम सभा में कल पारित 25 प्रस्तावों में से एक कहता है, ‘‘दारूल उलूम का (वंदे मातरम् गाने का विरोध करने वाला) फतवा सही है।’’

इससे पहले  उद्धव ठाकरे ने 'जमियत उलेमा ए हिंद' के मुस्लिम धर्मगुरु द्वारा जारी फतवा का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रगान वंदे मातरम् को गाओ नहीं तो पाकिस्तान चले आजो। गौरतलब है कि फतवा में कहा गया है कि वंदे मारतम् गान इस्लाम विरोधी है, इसलिए मुसलमान इसे नहीं गाएंगे। उद्धव ठाकरे ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जो राष्ट्रगान का विरोध करते हैं उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। ठाकरे ने कहा कि यह फतवा केंद्रीय गृहमंत्री के सामने जारी किया गया है। इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात और क्या हो सकती है? साफ बात है कि मुस्लिम वोटों के लिए सरकार अपनी पुरानी तुष्टिकरण की नीति अपना रही है। ऐसी सूरत में राष्ट्र का कोई भविष्य नहीं बचता। बिकी हुई कांग्रेस कुछ भी कहे पर वंदे मातरम् सिर्फ दो शब्द नहीं हैं।ये देशभक्ति का मंत्र हैं। इनके उच्चारण से देशप्रेम उमड़ने लगता है। ये देशभक्ति की आग जगाने वाली चिंगारी हैं। उन्होंने कहा कोई नागरिक मातृभूमि का नहीं तो किसका वंदन करेगा? भारत माता की वंदना करने में लज्जा का अनुभव क्यों हो रहा है? यह तो अड़ियलपन और मनमानी है। जो लोग भारत माता की वंदना नहीं कर सकते उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश या किसी और जगह चले जाना चाहिए। ऐसे गद्दारों के लिए भारत भूमि में कोई स्थान नहीं है। ठाकरे ने कहा इस तरह के फतवे हिन्दू मुसलमानों के बीच तनाव पैदा करते हैं। साथ ही उन्होंने शिवसैनिकों को राज्य भर में वंदे मातरम् के बोर्ड लगाने का निर्देश दिया।

 


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