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कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन

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कोपेनहेगन शिखर सम्मेलनजलवायु परिवर्तन से संबंधित कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने इस अमरीकी घोषणा का स्वागत किया है कि ग्रीन हाउस गैसों से मानवीय स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो रहा है। यूरोपीय संघ के प्रवक्ता ने कहा कि इस घोषणा से पता चलता है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को हल करने के लिए कुछ हद तक सहमत हैं। पर्यावरण से संबंधित अमरीका की मुख्य एजेंसी ने घोषणा की है कि ग्रीन हाउस गैसें अमरीकी लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गई हैं। पर्यावरणीय सुरक्षा एजेंसी-ईपीए ने कहा है कि श्री ओबामा चाहें तो वे अमरीकी सीनेट की मंजूरी के बिना भी उत्सर्जन में कटौती का आदेश जारी कर सकते हैं। इस समय कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने से संबंधित विधेयक का सीनेट में कड़ा विरोध किया जा रहा है। विरोध करने वालों में दो तरह के सदस्य शामिल हैं। एक वे हैं, जो कहते हैं कि पाबंदियां लगाने से अमरीका में नौकरियों में कटौती हो जाएगी और ऊर्जा मूल्य बढ़ जाएंगे। दूसरे प्रकार के सदस्य वे हैं, जो जलवायु परिवर्तन को स्वीकार ही नहीं करते, चाहे यह वास्तविक हो, या मनुष्य द्वारा निर्मित।

जलवायु परिवर्तन के बारे में संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिक नेटवर्क के अध्यक्ष राजेन्द्र पचौरी ने कहा है कि विधेयक भले ही अमरीकी सीनेट में विचाराधीन हो, लेकिन ओबामा प्रशासन जो कुछ कर सकता है, वह उसे ही दर्शा रहा है। स्वीडन के पर्यावरण मंत्री एन्द्रिएज कार्लग्रेन का कहना है कि कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन का परिणाम मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि अमरीका और चीन क्या फैसले लेते हैं। इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि यूरोपीय नेताओं को पहले हुई सहमति से भी अधिक मात्रा में कार्बन उत्सर्जन में कटौती का वायदा करना चाहिए। कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन में 192 देश भाग ले रहे हैं। इस समय जो बातचीत चल रही है, उसमें लगभग सौ नेता उत्सर्जन में कटौती करने और जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए वित्तीय उपायों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

 


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sadhak ummed singh baid  - सही ऊर्जा स्रोत   |117.199.116.xxx |2009-12-09 15:31:40
धरती के तल पर बने ऊर्जा स्रोत
अनन्य.
मत खोदो तुम पेट को, धरा
बनेगी धन्य.
धरा बनेगी धन्य,
जागृति निजमें लाओ.
समझो
प्रकृति-चक्र, पर्यावरण
बचाओ.
कह साधक कोपेन हेगनमें
नहीं मिले हल.
ऊर्जा स्रोत
अनन्य बने हैं धरती के तल.

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