उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से कहा कि दंडात्मक कार्रवाई से विश्व के सबसे पुराने पेशे पर पाबंदी लगाना अगर व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं हो तो क्या वह वेश्यावृत्ति को वैध बना सकता है।न्यायमूर्ति दलबीर भंडारी और न्यायमूर्ति एके पटनायक की पीठ ने सॉलीसीटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम से कहा, ‘जब आप कहते हैं कि यह विश्व का सबसे पुराना पेशा है और आप कानून से उस पर पाबंदी लगाने में सक्षम नहीं हैं तो आप उसे वैध क्यों नहीं बना देते।’ शीर्ष अदालत ने कहा कि महिलाओं की तस्करी को रोकने के लिए यौन व्यापार को वैध बनाना एक बेहतर विकल्प होगा। उसने कहा कि दुनिया में कहीं भी दंडात्मक उपायों से उस पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकी।न्यायालय ने कहा, ‘यौन व्यापार किसी न किसी रूप में चल रहा है और दुनिया में कहीं भी वे कानून से उस पर अंकुश लगाने में सक्षम नहीं हो सके हैं। कुछ मामलों में इसका संचालन छद्म रूप से हो रहा है। इसलिए आप इसे क्यों नहीं वैध बना देते।’ इस पर सॉलीसीटर जनरल ने कहा कि वह इस पर गौर करेंगे।शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी गैरसरकारी संस्था बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से दायर जनहित याचिका और चाइल्डलाइन की ओर से दाखिल हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई करने के दौरान आई। चाइल्डलाइन ने शिकायत की थी कि देश में व्यापक पैमाने पर बाल तस्करी हो रही है।