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Sep 09th
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जिन्ना से बड़े किसी नेता का इंतजार

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जिन्ना से बड़े किसी नेता का इंतजार

पाकिस्तान जब से पैदा हुआ है, ज्यादातर वक्त वह फौज के शिकंजे में कसा रहा। जाहिर है कि जिन्ना और लियाक़त के सपनों का पाकिस्तान आज भी एक सपना ही है लेकिन उसकी संसद ने 18वां संशोधन क्या पास किया, बुझे हुए चिरागों में रोशनी पैदा हो गई है।कई लोग मान रहे हैं कि राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी ने ऐतिहासिक साहस और त्याग का परिचय दिया है। उन्होंने अपने पर खुद ही कतर लिये हैं। अब राष्ट्रपति अपनी मर्जी से प्रधानमंत्री या संसद को भंग नहीं कर सकेगा। ज़रदारी अब जिया, इज़हाक या मुशर्रफ की तरह अपनी तानाशाही नहीं चला सकेंगे। प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी अब पाकिस्तान के ‘सीईओ’ बन गए हैं। क्या यह सच है?औपचारिक तौर पर यह सच है लेकिन वास्तविकता क्या है? सच्चाई यह है कि अब भी सारी शक्तियां आसिफ ज़रदारी के पास ही हैं। 18वें संशोधन की 95 धाराओं में से कई ऐसी हैं, जो उन्हें तानाशाह बना देती हैं। एक धारा के मुताबिक पाकिस्तान के राजनीतिक दलों के मुखियाओं को यह अधिकार है कि वे चाहें जिस सांसद को बर्खास्त कर सकते हैं यानी पार्टी अध्यक्ष चाहे तो प्रधानमंत्री को पार्टी से निकालकर प्रधानमंत्री पद छोड़ने को मजबूर कर सकता है।

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पाक से बड़े सौदे की तलाश में अमेरिका

पाक से बड़े सौदे की तलाश में अमेरिका

शिंगटन में अमेरिका-पाकिस्तान रणनीतिक वार्ता से अफगानिस्तान युद्ध के अंत की औपचारिक शुरुआत मानी जा सकती है। अमेरिकी अलकायदा को नेस्तनाबूद करने और तालिब...

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नई अफगान-नीति में नया क्या?

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नई अफगान-नीति में नया क्या?

ओबामा की नई अफगान-नीति में नया क्या है? उसमें ऐसा क्या है, जिसके कारण उसे बुश से अलग कहा जा सके? सिर्फ एक बात अलग है। वह यह कि अब से 18 माह बाद अफगानि...

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इंतजार का एक बरस

इंतजार का एक बरस

नपुंसक भी अपने ऊपर हुए हमले को नहीं भूल पाता। जख्म ताजे रहते हैं, आघात पर प्रतिघात की कसमसाहट बनी ही रहती है। 26 नवंबर स्वतंत्र भारत के इतिहास की ऐसी ...

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मुसलमान क्यों न गाएं वंदे मातरम्

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मुसलमान क्यों न गाएं वंदे मातरम्

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने फिजूल ही बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है। देवबंद का जो दारूल-उलूम योग के पक्ष में और आतंकवाद के विरुद्ध फतवा जारी करता है, वह ...

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