
भाजपा के युवा नेता और पीलीभीत से लोकसभा के उम्मीदवार वरुण गान्धी जिन्होने 28 मार्च को न्यायालय के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। अब रासुका के तहत जेल मे बन्द है, उन पर आरोप है कि उन्होने ऐसा भाषण दिया जिससे दो समुदायो के बीच तनाव फैल सकता था और समाज मे अशांति हो सकती थी। जिला प्रशासन के अनुसार वरुण पर रासुका लगाने की वजह उनके द्वारा पीलीभीत मे 5 और 6 मार्च को दिया गाया भडकाउ भाषण के अलावा 28 मार्च को पीलीभीत के न्यायालय मे समर्पण के दौरान भीड को उकसाया जिसकी बजह से हिंसा फैली। इन दो वजहो से वरुण पर रासुका लगाया गया ।सारे घटनाक्रम की शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते मे हुई। जब टीवी चैनलो ने वरुण के भाषण की सीडी को प्रसारित करना शुरु किया जिसमे वरुण द्वारा एक समुदाय विशेष के प्रति कठोर शब्दो का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया था। वरुण ने इस बात से इनकार किया और इसकी जांच कराने की मांग भी की। लेकिन जैसे ही सीडी के कुछ अंश का प्रसारण हुआ तो चुनाव आयोग हरकत मे आया और सीडी को देखने के बाद चुनाव आयोग ने भाजपा को सलाह दे डाली कि वह वरुण को अपना उम्मीदवार न बनाये। यह अपने आप मे आयोग का अभुतपूर्व फैसला था क्योकि आजादी के बाद से अबतक किसी दल को आयोग ने यह सलाह नही दी थी। वैसे आयोग को इस बात का अधिकार भी नही है। इससे जाहिर होता है कि वरुण मामले मे आयोग ने अपनी सीमा का अतिक्रमण किया है।






