चाय, मसाले, फल, सब्जी और कुछ विनिर्मित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ी है। श्री चिदम्बरम ने बढ़ती मुद्रास्फीति की दर को मामूली बताया और कहा कि कुछ समय तक यह दर इसी स्तर पर रहेगी और उसके बाद घटने लगेगी।
वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार सीमेंट उत्पादकों से कीमतें कम करने के बारे में बातचीत कर रही है। इसके अलावा विभिन्न प्रशासनिक उपाय पहले ही किए जा चुके हैं।
इनमें चार वस्तुओं के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाना और इस्पात उत्पादकों को स्वेच्छा से कीमतों में कटौती करने के लिए राजी करना शामिल है।
सरकार ने चार कृषि उत्पादों चना, सोया तेल, आलू और रबड़ के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया था। चावल, गेंहू, अरहर और उड़द के वायदा कारोबार पर पिछले वर्ष ही प्रतिबंध लगा दिया गया था।
थोक व्यापारियों की जमाखोरी से कीमतें बढ़ रही है। इससे निपटने के लिये प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उद्योग जगत ने महंगाई रोकने में मदद नहीं की, तो सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करेगी।
कांग्रेस ने आशा व्यक्त की है कि पिछले महीने वित्तमंत्री के घोषित कड़े उपायों से दो-तीन हफ्तों में मुद्रास्फीति की दर गिर जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि यूपीए सरकार मुद्रास्फीति में वृद्धि को रोकने में विफल रही है।
सरकार जैसे कदम उठाया मुद्रास्फीति के उपर अंकुश नहीं लग रहा। इतना आसानी से मुद्रास्फीति कम नहीं होंगे। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के कीमत, खाद्यान्न का दाम बढ रहा है। पूरे विश्व में ऐतिहासिक स्तर में पहुंच गये हैं तो इसका असर तो भारतवर्ष में पडेंगे ही। इसका मतलब यह है कि आम आदमी के उपर महंगाई की मार और से ज्यादा जोरदार लगेगा और जितने सारे कदम उठाया सरकार मेरा ख्याल है अभी कुछ महीना लगेगा मुद्रास्फीति कम होने के पहले।