विश्लेषण कर्त्ता गोल्डमैन के अनुसार तेल की कीमते बढ़कर 150 डालर प्रति बैरल से 200 डालर प्रति बैलर के बीच हो सकती है। विकासशील देशों में इसकी मांग बढ़ना भी एक प्रमुख कारण है। तेल पर आधारित विश्व अर्थ व्यवस्था की जगह कोई और अर्थ व्यवस्था बनाना मुश्किल है।
विश्व में बढ़ती हुई ग्लोबल वार्मिंग से विश्व को सबसे ज्यादा खतरा है। इस देश विदेश में इस पर बहस भी बढ़ रहा है। सच्चाई यह भी है कि अभी तक विश्व ऐसी कोई वैकाल्पिक ऊर्जा को स्रोत नहीं ढूंढ पाया है, जो तेल का स्थान ले सके। एक क्षेत्र है जहां पर कुछ किया जा सकता है। वह ट्रांसपोर्ट का क्षेत्र जहां पर तेल की 90 प्रतिशत खपत होती है। भविष्यवाणी है कि अगले 15 वर्षो में कारो की संख्या जो वर्तमान में 700 मीलियन बढ़कर 1.5 मीलियन हो जायेगी।
भारत जहां पर ओटो बजार ऊफॉन पर है यहां पर कारो की बिक्री बढ़कर 1 मीलियन पहुंच गई है। अब जरूरत है हाईब्रीड गाड़ियां बनाने की जिससे तेल की खपत को कम किया जा सके।
जरूरत है ऐसे इंजन की आविष्यकार करने की जो गैस इथोनिल बिजली से मिलकर चले। भारत को इस दिशा में शोध कर आगे बढ़ने की जरूरत है। भारत फिलहाल फायदे की स्थिति में है जहां अधार भूत संरचना में विकास कर कार्य हो रहा है। ब्राजील इस दिशा में आगे बढ़ चुका है, जरूरत है भारत को आगे कदम बढ़ने की।