शरद पवार ने गेहूं आयात करने की संभावना से भी इन्कार किया क्योंकि गेंहूं की सरकारी खरीद अच्छी हुई है। नई दिल्ली में शरद पवार ने पत्रकारों से बातचीत में आशा व्यक्त की कि गेहूं की सरकारी खरीद जल्दी ही दो करोड़ टन तक पहुंच जाएगी।
सरकार ने मंहगाई पर काबू पाने के उपायों के तहत अभी तक छह जिन्सों के वायदा करोबार पर रोक लगाई है और ये हैं- चावल, गेहूं, रबर, चना, आलू और सोया। इससे पहले दो दिन के फल और सब्जी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री पवार ने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षो में देश के कृषि विकास में बागवानी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि पिछली तीन पंचवर्षीय योजनाओं में जोर दिये जाने के बावजूद बागवानी उत्पादो की मांग और आपूर्ति के बीच अब भी बड़ा फर्क है।
पवार ने कहा कि उत्पादकों और प्रसंस्कण में लगे लोगों की प्रौद्योगिकी संबंधी जरूरतों को देखते हुए समुचित हाट व्यवस्था, नीति परिवेश और आवश्यक तंत्र कायम करना जरूरी है ताकि उत्पादन में स्थिरता बनी रहे। उन्होंने प्रसंस्कण उद्योग और निर्यातकों की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए निजी पूंजी निवेश बढ़ाने और खासकर विपणन, अनुसंधान और विकास के क्षेंत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर सी. रंगराजन ने कहा है कि मुद्रा स्फीति की दर अगले तीन-चार महीनों में घटकर ६ प्रतिशत के स्तर पर आ जायेगी। उन्होंने कहा कि मानसून की सामान्य वर्षा और अन्य क्षेत्रों के प्रदर्शन के अनुसार इसमें और गिरावट आ सकती है और यह पांच या साढ़े पांच प्रतिशत तक पहुंच सकती है। संवाददाताओं से बातचीत में श्री रंगराजन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर भी सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर पर पड़ सकता है। लेकिन उन्होंने कहा कि इससे देश की विकास प्रक्रिया पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।