तीन मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान मुद्रास्फीति की दर बढ़कर सात दशमलव आठ - तीन प्रतिशत हो गई है जो पिछले ४४ महीने में सर्वाधिक है। इससे पहले, यह सात दशमलव छह - एक प्रतिशत थी। मुद्रास्फीति में यह बढ़ोतरी जरूरी चीजों और कुछ विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से हुई है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर बहुत जल्द दिखाई देगा। मुद्रास्फीति में यह बढ़ोतरी जरूरी चीजों और कुछ विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से हुई है। सप्ताह के दौरान फल-सब्जियों, मसालों, काफी और मसूर जैसी कुछ दालों की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा नाफ्ता, फर्नेस ऑयल और लाइट डीजल की कीमत भी बढ़ी है। महंगाई रोकने के लिए सरकार ने हाल में कई उपाय किए हैं। समझा जाता है कि इनका असर सामने आने में कुछ समय लग सकता है। खाद्यान का भाव बढ़ना चिंता का विषय है।
भारत सरकार ने जितना कदम उठाया मुद्रास्फीति के उपर अंकुश लगने के लिए लेकिन इसका असर नहीं पडा। जो थोक मूल्य सूचकांक है अभी भी बढ रहा है। सात दशमलव आठ तीन फीसदी जो बढ रहा है होलेसल प्राइजेस इंडेक्स । इसका मतलब यह है कि सितम्बर ११, २००४ इस स्तर में रिस्क फीचर है। जो चिंताजनक बात है कि अभी भी खाद्यान का दाम कम नहीं हो रहा है। यही सबसे बड़ी समस्या वित्तमंत्री चिदम्बरम ने कहा था कि उनका उम्मीद है कि अभी मुद्रास्फीति के उपर अंकुश लगेगा मगर अभी तक तो नहीं लगा। आने वाले हफ्ते में मालूम पडेगा कि सरकार जितना कदम उठाया उसका मुद्रास्फीति के उपर क्या असर पडेगा।