भारत ने कहा है कि व्यापार संबंधी बहुपक्षीय नियमों की खामियों को हटाया जाए ताकि दोहा दौर की वार्ता में विश्व व्यापार को लेकर समझौता हो सके। भारत ने कहा है कि विश्व व्यापार संगठन - डब्ल्यूटीओ वार्ता का लक्ष्य दुनिया से गरीबी कम करना होना चाहिए, न कि धनी देशों की सम्पन्नता को और बढ़ाना। विकास के लिए वैश्विक भागीदारी विषय पर सम्मेलन को संबोधित करते हुए वाणिज्यमंत्री कमलनाथ ने विकसित देशों से कहा कि वे अपने यहां कृषि पर भारी सब्सिडी में कटौती करें, ताकि विकासशील देश विश्व बाजार में उनकी बराबरी कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य भागीदारी को बढ़ावा देना है।
दोहा दौर की वार्ता का जिक्र करते हुए श्री कमलनाथ ने कहा कि यह रास्ते का एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। उन्होंने कहा कि दोहा दौर की मौजूदा वार्ता पिछली वार्ता से इस मायने में अलग है क्योंकि तब से लेकर अब तक दुनिया भर में राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में व्यापक बदलाव आ चुके हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक पास्कल लेमी ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि व्यापार के जरिए गरीब देशों का विकास हो सकता है और दोहा वार्ता इसी पर केन्द्रित है। इस बीच, विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक पास्कल लेमी ने प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह से मुलाकात की। समझा जाता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री से जानना चाहा कि भारत दोहा दौर की विश्व व्यापार वार्ता पर बातचीत जारी रखना चाहता है या इसके लिए कुछ समय लेना चाहता है।
अगर दोहा वार्ता सफल हुई होती, तो विश्व अर्थव्यवस्था में 136 अरब डॉलर का निवेश होने की संभावना थी। दो दिन के इस सम्मेलन में विश्व व्यापार में भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक मानदंड तैयार किये जाएंगे। फिक्की द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देश विदेश के प्रमुख विशेषज्ञ अपने विचार पेश करेंगे।