तेल उत्पादन में रोजाना 5 लाख 20 हजार बैरल की कटौती के तेल उत्पादक और निर्यातक देशों के फैसले से तेल की कीमत फिर 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गयी। विएना में ओपेक देशों की बैठक में यह फैसला होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से नीचे पहुंच गयी थी। जुलाई में अंतर्राष्ट्रीय मंदी के बीच तेल की कीमतें 147 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक हो गई थी। न्यूयॉर्क में अक्टूबर की आपूर्ति के लिए लाइट स्वीट कूरड में एक डॉलर 41 सेंट की बढ़ोतरी हुई। बेंरट नॉर्थ सी कूरड में भी एक डॉलर 6 सेंट की वृद्धि हुई। इन कीमतों का असर एशियाई बाजारों में भी देखा गया। ओपेक अध्यक्ष और अल्जीरिया के ऊर्जा मंत्री चाकिब खलील ने बताया कि कटौती तत्काल लागू हो जाएगी। आने वाले समय में तेल मूल्य में और गिरावट आ सकती है।
कहा जा रहा है कि आर्थिक मंदी की वजह से बड़े विकसित देशों में ईंधन की मांग घटी है, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में ये गिरावट आई है। इस गिरावट की वजह से तेल बेचने वाली तीन बड़ी कंपनियां इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को एक साल बाद यानि पिछले अगस्त में पहली बार प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री पर मुनाफा हो रहा है। अगर तेल के दाम और नीचे आए तो सामान्य पेट्रोल की बिक्री से भी मुनाफा हो सकता है
ओपेक ने कच्चे तेल के उत्पादन मे जो कटौती की है। वह एक छोटी अवधि तक जरूर रहेगी। बाजार में जहां से हम देख सकते है कि कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर तक पहुंच चुका है। लेकिन मोटे तौर पर मैं मानता हूं कि आने वाले छः आठ महिनों की हम बात करे तो उसमें करीबन 85 से 90 डॉलर तक जाकर सीमित होगा।