इसकी वजह से 500 ग्रामीणों को विस्थापित भी होना पड़ा है। दोनों गुटों की ओर से झड़प में बम और बंदूकों के इस्तेमाल की खबर है।
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार और सीआरपीएफ से पंचायत चुनावों के दौरान सीपीएम के एक सांसद व सीआरपीएफ के एक सीनियर ऑफिसर के बीच खुलेआम विवाद पर डीटेल रिपोर्ट मांगी। सीआरपीएफ का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में उसके अधिकारियों को जानबूझकर 'प्रताड़ित' किया जा रहा है।
नंदीग्राम में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा, घरों में तोड़फोड़ और अपहरण के आरोप लगा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस नेता अबू ताहिर ने दावा किया कि उनकी पार्टी के पांच समर्थक नंदीग्राम में झड़प में घायल हो गए हैं। दूसरी ओर सीपीएम नेता अशोक गुरिया ने कहा कि हमारी पार्टी के पांच समर्थक जख्मी हुए हैं। चुनाव के पहले प्रशासन की मदद से घरों को लौट चुके करीब 500 लोग फिर बीडीओ ऑफिस के पास शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
सीपीएम सांसद लक्ष्मण सेठ और सीआरपीएफ के डीआईजी आलोक राज के बीच रविवार को टेलिफोन पर अधिकारक्षेत्र को लेकर कहासुनी हुई थी। राज पर कुछ महिलाओं ने छेड़छाड़ का आरोप भी लगाया, जिससे उन्होंने इनकार किया था।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि कहा कि राज्य सरकार से इस बारे में डीटेल रिपोर्ट तलब की गई है। अनुमान है कि रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय स्थिति का आकलन करने के लिए सीनियर अधिकारियों की हाई लेवल बैठक बुलाएगा। राज के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप के बाद सीआरपीएफ ने शिकायत की है कि नंदीग्राम में तैनात उसके अधिकारियों को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है।