दिल्ली उच्च न्यायलय सच्चर समीति के इस सुझाव पर प्रश्न चिन्ह लगाया है कि मुस्लिम के उत्थान के लिए विशेष प्रयास करना चाहिए। जजो की पीठ ने पूछा की यह एक समुदाय विशेष के तुष्टीकरण का प्रयास तो नही है। सरकार लोगो की भलाई के लिए पैसा खर्च करती है, केन्द्र किसी एक समुदाय के उत्थान के लिए पैसा खर्च करने पर अमादा है.
केन्द्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए सहायक महाधिवक्ता पीपी मल्होत्रा ने दो जजों की पीठ जिसकी अध्यक्षता न्याय मूर्ति टी.एस ठाकुर और सिद्धार्थ मृदुल को बताया कि केन्द्र सरकार ने 90 मुस्लिम बहुल पिछड़े जिलों की पहचान कर उसमें ज्यादा से ज्यादा सहकारी बैंको की शाखा खोली जाये जिससे मुसलमानो को तरक्की करने में मदद मिल सके।
बहस के बीच में हस्तक्षेप करते हुए न्यायधीश ठाकुर ने जानना चाहा कि सच्चर समीति के गठन के पीछे सरकार की मंशा क्या थी ? क्या यह एक समुदाय को तुष्टीकरण करने के लिए तो नही है। अगर आप गरीबी से लड़ना चाहते है तो धर्म क्यों आड़े आ रहा है। गरीब गरीब होता है इसमें हिंदू गरीब और मुस्लिम गरीब कहां से गया है।
सरकार ने अपने अनुशंसा में कहती है कि मुसलमानों पर ज्यादा पैसा खर्च करेगी इसका मतलब यह तो नहीं है कि बहुसंख्यक आबादी पर कम पैसा खर्च करेगी। न्यायधीश ने महाधिवक्ता को याद दिलाया कि हमारी सरकार सभी समुदायों के उत्थान के लिए कटिबद्ध है। सिख, मुस्लिम, ईसाई के उत्थान के लिए कार्य हो रहा है तो, बहुसंख्यक समुदाय के लिए क्यों नहीं।
पूरे बहस के दौरान मल्होत्रा का कहना था कि मुस्लिम समाचारों में इस लिए आ जाते है क्योंकि वे भारतीय आबादी के सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं, सारे बहस के दौरान मल्होत्रा तर्क यही था।
आपको याद होगा सच्चर समीति अपनी रिपोर्ट 2006 में सरकार को सौंपी थी। देश में मुसलमानों की समाजिक, आर्थिक, शिक्षा के क्षेत्र में उसकी वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट में दर्ज थी। सरकार द्वारा लिये जा रहे सारे प्रमुख निर्णय इसी रिपोर्ट के आधार पर है। इसी में देश के 358 ऐसे शहरों को चिंहित किया गया है जिसमें मुसलमानों की अबादी ज्यादा है। इन शहरों के विकास की योजना इस ढंग से तैयार की गई है कि मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचे। न्यायलय ने सरकार को 21 अगस्त तक का समय दिया है जबाब देने के लिए। अगली सुनवाई 31 अगस्त 2008 को होगी।