सीपीएम के कार्यकर्त्ताओं ने जिस तरह से अपने सहयोगी आरएसपी के मंत्री सुभाष नशकर के घर पर बम फेका और आग लगा दी। सीपीएम और मित्र दलों के बीच अब तक की सबसे बड़ी संघर्ष घटना है ।
गौरी नशकर जो पश्चिम बंगाल के मंत्री सुभाष नशकर(सिचाई विभाग) के रिश्तेदार है, 90 प्रतिशत जली हालत में कलकत्ता के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसका पति उदय नशकर जो उसका पति है और मंत्री का भतीजा है उसे भी चोट आई है।
वाम मोर्चा में कड़वाहट इतनी बढ़ गई है कि सीपीएम के संरक्षककर्ता ज्योति बासु के अनुसार मोर्चा को पुन: जागृत करने की आवश्यकता है। दो दिन पहले आरएसपी के तीन समर्थक को सीपीएम के कार्यकर्त्ताओं ने मार दिया था। 294 सदस्य पश्चिम बंगाल विधान सभा में आरएसपी के 23 विधायक है।
चौबीस परगना के वसंती पंचायत में जहां पर आरएसपी काफी मजबूत है और सीपीएम को सहायक की भूमिका निभानी पड़ती है। स्थिति की अनोखता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर सीपीएम विपक्ष की भूमिका में है। क्योंकि तृणमूल कांग्रेस,और कांग्रेस का यहां पर कोई जनाधार नही है। पिछली बार की तरह इस बार भी समझौता नही होने की वजह से दोनों पार्टियों ने अपने उम्मीदवार खड़े किये है।
एक अनुमान के अनुसार राज्य में 41,000 ग्राम पंचायत सीट है जिसमें सीपीएम ने एकतरफा 36,903 सीटों पर अने उम्मीदवार खड़े कर दिये है। बाकी गठबंधन के पार्टियों के लिए 4,500 सीट ही बचती है। इसके चलते आरएसपी और फारवर्ड ब्लाक ने 5,000 उम्मीदवार खड़े किये है। उसी में से बंसती पंचायत की भी सीट है।
इसकी देखते हुए आरएसपी जो पश्चिम बंगाल के मंत्री सुभाष नशकर(सिचाई विभाग) ने कहा कि यहां पर नंदीग्राम मॉडल को अपनाने की जरूरत है। नंदीग्राम मॉडल में सभी विपक्षी पार्टियां एक होकर सीपीएम को हराने के लिए चुनाव लड़ती है।
मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने समझौते की पेशकश की है। जो तत्कालीक समझौता हुआ है। उसके अनुसार आरएसपी ने बंद का आह्वान वापस ले लिया है। सीपीएम अगामी दस दिनों तक जुलूस नही निकालेगी। कुछ बूथों पर दोबारा मतदान होगा जिस पर किसी भी पार्टी के कार्यकर्त्ता मौजूद नही रहेंगे। सीपीएम अपने सहयोगी दल का नही हो पा रहा है जिसके बूते पर सत्ता में है, तो बाकी का क्या होगा ?