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Sat, 17 May 2008 14:10:00

राज्य में आतंकी नेटवर्क

केंद्रीय गुप्तचर एजेंसी के मुताबिक उदयपुर में शराब और प्रतापगढ़ में ड्रग माफियाओं का नेटवर्क रहा है। अजमेर में ड्रग माफियाओं का बड़ा नेटवर्क है। गुजरात जाने और आने के लिए नेशनल हाइवे आठ का माफियाओं ने कई बार उपयोग किया है।
जयपुर धमाके के चित्र

राज्य में आतंकवादी गतिविधियों के संचालन और बेनामी संपत्तियों में निवेश के लिए उदयपुर, अजमेर और जयपुर त्रिवेणी बन गया है।

नेटवर्क संचालित करने के लिए सारी योजनाएं उदयपुर और आसपास के इलाकों में बनाई जाती हैं। क्रियान्वयन के लिए बैठकें अजमेर में होती हैं। योजनाओं को अंतिम रूप जयपुर में दिया जाता है। खुफिया पुलिस को इस संबंध में कुछ सुराग हाथ लगे हैं। खुफिया पुलिस पहले भी इस बारे में राज्य सरकार को रिपोर्ट भेज चुकी है। पुलिस को अंदेशा है कि इस नेटवर्क में कुछ लोग सिमी जैसे आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं।

मुंबई अंडरवल्र्ड के लोगों का मप्र और गुजरात के अपराधियों से ताल्लुक हैं। उन्हें मादक पदार्र्थो की तस्करी और सट्टे से भी मदद मिलती है। अंडरवल्र्ड और उनसे जुड़े सिमी जैसे आतंकी संगठनों के लोगों की आवाजाही भी बढ़ती जा रही है। आतंकियों को बेनामी संपत्तियों में किए गए निवेश से भी पैसा मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार जयपुर सहित कुछ शहरों में उन्होंने बेनामी संपत्ति खरीदी है।

खुफिया पुलिसकर्मियों ने इस बारे में कुछ भू-माफियाओं से पूछताछ की, लेकिन सबूत हाथ नहीं लगे। केंद्रीय गुप्तचर एजेंसी के मुताबिक उदयपुर में शराब और प्रतापगढ़ में ड्रग माफियाओं का नेटवर्क रहा है। इन लोगों के अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोग भी इनके संपर्क में आ जाते हैं। जिनकों इनकी मदद मिलती है। अजमेर में ड्रग माफियाओं का बड़ा नेटवर्क है। गुजरात जाने और आने के लिए नेशनल हाइवे आठ का माफियाओं ने कई बार उपयोग किया है।

कार्यस्थली जयपुर

आतंकियों ने जयपुर को कार्यस्थली बना रखा हैं। इसके साथ ही अंडरवल्र्ड व आतंकी संगठनों ने जयपुर और उदयपुर में निवेश भी कर रखा है। अधिकांश निवेश जमीनों में किया है।

मिलने का स्थान अजमेर

मुस्लिम आबादी की बहुतायत के कारण अजमेर में मीटिंग में आसानी होती है। इसके बाद ये लोग अगले चरण के लिए जयपुर चले जाते हैं या उदयपुर से मध्यप्रदेश या गुजरात निकल जाते हैं।

उदयपुर से कई रास्ते

गुजरात और मध्यप्रदेश की सीमा से सटा होने के कारण उदयपुर संभाग आतंकियों की आवाजाही के लिए बेहद सुगम और सुरक्षित है। यहां से मध्यप्रदेश जाने के चार और गुजरात जाने के पांच रास्ते हैं। खुफिया पुलिस का मानना है कि राज्य में कोई भी वारदात करने के बाद ये लोग उदयपुर के रास्ते आसानी से बाहर निकल सकते हैं।

पुलिस को जब तक पुख्ता प्रमाण हाथ नहीं लगते हैं, तब तक मैं कुछ नहीं बोल सकता हूं। उदयपुर में देखे गए युवक के बारे में भी पुलिस को कोई क्लू हाथ नहीं लगा है।

हिंदू संगठन सतर्क

आतंककारी गतिविधियों में संलग्न लोगों पर अब हिन्दू संगठनों ने नजर रखना शुरू कर दिया है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को संदिग्ध लोगों की सूची बनाने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ शीघ्र एक अभ्यास वर्ग शुरू कर रहा है जिसकी रचना तैयार की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार आरएसएस, विहिप, राष्ट्र सेविका समिति व बजरंग दल ने अपने स्वयंसेवकों व कार्यकर्ताओं को मौहल्लों में सतर्क और सावधान रहने के निर्देश दिए हैं। उनसे अपनी बस्तियों में ऐसे संदिग्ध लोगों पर निगरानी रखने को कहा गया है जो यदा कदा वहां आते हैं, बिना नंबर की गाड़ियां होती हैं और कॉलोनी के कुछ मकानों में ही देखे जाते हैं। ऐसे लोगों की सूची संगठन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

आतंकवादियों के सामने खुफिया एजेंसियां फेल हो गई हैं। हम हमारी जिम्मेदारी आ गई है कि हम ऐसे देशद्रोहियों का पता लगाए। हमने कार्यकर्ताओं को कहा है कि वे बांग्लादेशी और अन्य संदिग्ध लोगों का पता लगने पर उनकी सूची तैयार करें।


 


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