वंदे मातरम गीत नेपाल में नई सरकार बनाने जा रहे वहां के पूर्व माओवादी गुरिल्लों के निशाने पर आ गया है। ब्रिटिश सरकार ने 1940 में 'वंदे मातरम' गीत पर बैन लगा दिया था। आजादी की लड़ाई में यह गीत भारतीय स्वाधीनता सेनानियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्त्रोत था, जिसे भारत के जानेमाने लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था।
माओवादी छात्र संगठन ने पूर्वी नेपाल में भारत-नेपाल सीमा पर चल रहे एक स्कूल को कथित तौर पर स्टूडेंट्स को वंदे मातरम गीत सिखाने के आरोप में सात दिनों के अंदर बंद करने के लिए कहा है। छात्र संगठन के इस कदम को माओवादियों की पारंपरिक विरोधी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) की छात्र इकाई ने भी समर्थन दिया है। दोनों छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर विराट नगर के दिल्ली पब्लिक स्कूल को एक सप्ताह के अंदर बंद नहीं किया गया तो वे इसे सोमवार को जबरन बंद कर देंगे।
संगठनों के बयान के अनुसार, नेपाल के कुछ सुस्थापित व्यावसायिक समूहों के समर्थन वाला यह स्कूल नेपाल के शिक्षा संबंधी कानूनों का व्यापक उल्लंघन कर चलाया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि इस स्कूल ने पिछले साल खुद को एक गुरुकुल सोसाइटी के रूप में रजिस्टर्ड कराया था और सिर्फ पाचवीं तक की कक्षा आयोजित करने की अनुमति हासिल की थी लेकिन अब यह दिल्ली पब्लिक स्कूल के नाम से सातवीं तक की कक्षा चला रहा है।
नेपाल में सिर्फ विदेशी दूतावासों के द्वारा चलाए जा कुछ चुनिंदा स्कूलों, जैसे भारत के केंद्रीय विद्यालय को ही दूसरे शिक्षा बोर्ड के सिलेबस चलाने की अनुमति है। बाकी सभी स्कूल नेपाल के शिक्षा और खेल मंत्रालय से अनुमोदित सिलेबस ही अपना सकते हैं। दोनो छात्र संगठनों का आरोप है कि विवादास्पद स्कूल अनधिकृत रूप से भारतीय सिलेबस के अनुसार भारत के इतिहास और संस्कृति के बारे में जानकारी दे रहा है।
माओवादी छात्र संगठनों ने स्कूल का विरोध तब शुरू किया, जब उनका ध्यान इस ओर दिलाया गया कि स्कूल में 'वंदे मातरम' गीत सिखाया जा रहा है और यहां वे किताबें चलाई जा रही हैं जो भारतीय स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं। संगठन स्कूल में भारतीय शिक्षकों की नियुक्ति का भी विरोध कर रहा है। माओवादी छात्र संघ की केंद्रीय समिति की सदस्य नमिता नियुपणे ने कहा, ''यह नेपाल की राष्ट्रीयता पर हमला है। स्कूल को फौरन बंद किया जाना चाहिए।''
इससे पहले माओवादियों ने नेपाल में हिंदी फिल्मों का प्रदर्शन रोकने की भी धमकी दी थी। उनका कहना था कि ये फिल्में भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार का जरिया हैं।