प्रधानमंत्री डॉ० मनमोहनसिंह ने कहा है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र का चहुमुखी विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस क्षेत्र के सभी राज्यों की राजधानियों को रेल सम्पर्क से जोडे जाने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास और इन क्षेत्रों को अच्छी तरह से जोड़ा जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले बुनियादी सुविधाओं की कमियों को दूर करने के लिए कई कदम उठाए गये हैं। इनमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक महत्वाकांक्षी सड़क निर्माण कार्यक्रम शामिल है। वे नई दिल्ली में पूवोत्तर क्षेत्र दृष्टिपत्र दो हजार बीस जारी करने के बाद एक समारोह को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री ने अरूणाचलप्रदेश के सभी सीमावर्ती गांवों के विद्युतीकरण के कार्यक्रम और अरूणाचलप्रदेश में राजमार्ग बनाने की योजना की भी चर्चा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस दृष्टिपत्र को वास्तविक बनाने के लिए पूरी कोशिश करेगी।
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ साथ कृषि और ग्रामीण विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि पूर्वोत्तर में विशेष हरित क्रांति की जरूरत है। उन्होंने स्थानीय संस्थाओं के महत्व और निचले स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च श्रेणी की शिक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में लंबे समय तक हिंसा का दौर रहा है अब यहां विकास की बारी है। उन्होंने इस क्षेत्र के लोगों से शांति और सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए एकजुट होकर काम करने की भी अपील की।दृष्टिपत्र दो हजार बीस में इस क्षेत्र की चुनौतियों और इस दृष्टिपत्र को वास्तविकता में बदलने की नीतियों का ब्यौरा दिया गया है।
पूर्वोत्तर के राज्यों के लोगों और सम्बद्ध पक्षों की आशाओं और अकांक्षाओं पर आधारित दृष्टिपत्र बनाने का विचार पहली बार प्रधानमंत्री ने तीन वर्ष पहले सुझाया था। जिसका उद्देश् इस क्षेत्र को तेजी से विकास के पथ पर लाना था ताकि इसे मुख्य धारा के साथ जोड़ा जा सके।
बुनियादी सुविधाओं की कमी, कम उत्पादन और बाजार तक उनकी कम पहुंच के साथ-साथ क्षेत्र की 96 प्रतिशत सीमाओं का पड़ोसी देशों के साथ लगे होना तथा उग्रवाद की वजह से यहां पर निजी निवेश बहुत कम रहा है। इन सबको देखते हुए एक ऐसे दृष्टिपत्र की जरूरत थी जिससे यहां पर संपूर्ण विकास हो पाये और उसका फायदा क्षेत्र के हर तबके को हो। ये सुनिश्चित किया जा सके कि सबसे महत्वपूर्ण बात संपर्क की कमी को रेल लाइनों तथा सड़क आदि से जोड़ने पर और मूलभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए रणनीति और उसे किस तरह से लागू किया जा सकता है यही सब इस दृष्टिपत्र में दर्शाया गया है और उसके साथ-साथ इस क्षेत्र में व्यापार और विकास को बढ़ावा देने के लिए किस तरह से पूर्वोमुखी नीति इसमें सहायक सिद्ध हो सकती है इस पर भी जोर दिया गया है।