भारत में मुसलमानों के सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थान, देवबंद के दारुल उलूम ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर पहली बार टिप्पणी करते हुए कहा है कि इसे मुस्लिम हितों से जोड़ना मुनासिब नहीं है। गौरतलब है कि बीएसपी नेता, मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को और इससे पहले पिछले हफ्ते कहा कि यह समझौता मुस्लिम विरोधी है। सीपीएम नेता एम. के. पंधे भी कह चुके हैं कि इस समझौते से मुसलमान नाराज होंगे।
दारुल उलूम के नायब मोहतमिम और मुफ्ती अहसान कासमी, मुफ्ती जफीरुद्दीन और मौलाना जावेद ने कहा कि कुछ सियासी पार्टियां इसे मुस्लिम हितों के खिलाफ बता रही हैं, जो आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि भारत का मतदाता बहुत जागरूक और समझदार है। वह किसी के बहकावे में नहीं आ सकता। जहां तक मुसलमानों का संबंध है, वे शांति और भाईचारा चाहते हैं। परमाणु समझौता उनके लिए चुनावी मुद्दा नहीं हो सकता।
मौलाना जावेद ने कहा कि देश की संसद और विज्ञानी ही तय कर सकते हैं कि परमाणु समझौता देशहित में है या नहीं। मुस्लिम आलिमों का इससे सरोकार नहीं है। इस समझौते को सांप्रदायिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी इसका समर्थन करे और बीएसपी विरोध करे, तो मुसलमान इसमें क्या करें? सियासी मामलों में मुस्लिम हित तलाशना नादानी है।