योजना आयोग की सदस्य और इस्लामी शिक्षा की विद्वान सैयदा हामिद ने इतिहास कायम कर दिया। उन्होंने काजी बनकर एक निकाह करवाया। यह पहली बार है, जब किसी महिला ने काजी बनकर निकाह पढ़वाया है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर इमरान नईम और भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन नाम के सामाजिक संगठन की संस्थापक सदस्य नाइस हसन का निकाह करवाने के लिए सैयदा हवाई जहाज के जरिए लखनऊ पहुंचीं। शहर के एक होटल में शाम को हुए निकाह समारोह में प्रबुद्ध नागरिक भी मौजूद थे। होने वाले शौहर और बीवी का परिचय अंग्रेजी में दिया गया। यही नहीं, निकाह भी अंग्रेजी में ही पढ़वाया गया। गवाह भी चार महिलाएं ही बनीं।
जानकारों का कहना है कि हालिया मुस्लिम इतिहास में किसी महिला द्वारा निकाह पढ़वाने का कोई जिक्र नहीं मिलता। हालांकि, पैगंबर मोहम्मद के समय में महिलाओं के काजी और मुफ्ती बनने की बातें जरूर पढ़ने को मिलती हैं। निकाह के बाद हसन ने कहा कि हमारे परिवार और स्थानीय धर्मगुरुओं का रुख सकारात्मक रहा है। हसन के परिजनों ने कहा कि यह निकाह पूरी तरह इस्लाम के नियमों के तहत हुआ है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और शिया विद्वान कल्बे जव्वाद ने कहा कि इस तरह किसी महिला द्वारा निकाह पढ़वाने में कुछ भी गलत नहीं है, अगर उसे भी पुरुष काजी जितना ज्ञान हो। हालांकि, फर्रुखाबाद की ईदगाह कमिटी के अध्यक्ष रियाज अहमद इस निकाह की कानूनी पहलू पर सवाल खड़ा करते हैं। वह पूछते हैं कि क्या सरकार इस निकाह को मान्यता देगी?