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Fri, 12 Sep 2008 10:41:00

भौतिक विज्ञान के परीक्षण में भारतीय योगदान

वैसे 10 अरब डॉलर के इस बहुराष्ट्रीय विशाल परीक्षण में 2,000 वैज्ञानिक काम कर रहे हैं, जिनमें से करीब 200 भारतीय मूल के हैं । मुंबई के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत ने अणु खंडित करने की इस नई मशीन, जिसे लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर नाम दिया गया है, को बनाने में बहुत बड़ा वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान दिया है

विश्व के सबसे शक्तिशाली भौतिक विज्ञान के परीक्षण में, जिसका पहला बड़ा परीक्षण यूरोप में पूरा हुआ, भारतीयों का भी योगदान है । इस परीक्षण में 30 भारतीय वैज्ञानिक काम कर रहे हैं । वैसे 10 अरब डॉलर के इस बहुराष्ट्रीय विशाल परीक्षण में 2,000 वैज्ञानिक काम कर रहे हैं, जिनमें से करीब 200 भारतीय मूल के हैं । मुंबई के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत ने अणु खंडित करने की इस नई मशीन, जिसे लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर नाम दिया गया है, को बनाने में बहुत बड़ा वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान दिया है ।

इन्दौर के राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की अध्यक्षता में भारतीय प्रयोगशालाओं ने इस मशीन, एलएचसी के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इसके बहुत सारे कल-पुर्जे भारतीय कारखानों में बनाए गए हैं तथा सर्न को भेजे गए हैं । यह जानकारी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के उच्च ऊर्जा भौतिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्रोफेसर अतुल गुर्टू ने दी । इसके अतिरिक्त, दो भारतीय वैज्ञानिक दल विभिन्न परीक्षणों में शामिल हैं । इनमें जयपुर के वैज्ञानिक दम्पत्ति सुधीर रानीवाला और उनकी पत्नी रश्मि भी हैं ।


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