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Fri, 12 Sep 2008 13:34:00

न्यायिक सुधार के लिए आत्म मंथन की आवश्यकता

डॉक्टर मनमोहन सिंह ने बताया कि राज्यों से कहा गया है कि वे जिला और अधीनस्थ स्तरों पर न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाएं ताकि विचाराधीन मामलों को निपटाया जा सके। साथ ही न्यायिक व्यवस्था के मौजूदा ढांचे को बेहतर बनाने के लिए भी कहा गया है
 
प्रधानमंत्री ने कहा है कि सभी न्यायिक नियुक्तियों में उच्च स्तर बनाए रखने के लिए आत्ममंथन किया जाना चाहिए। आज नई दिल्ली में एक समारोह में डॉक्टर मनमोहन सिंह ने न्यायिक सुधार लाने में निजी तौर पर दिलचस्पी लेने में देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. जी. बालाकृष्णन की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यू पी ए सरकार ने कानूनी सशक्तीकरण और न्यायिक सुधार को बढ़ावा देने की दिशा में कई उपाय किए हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमों पर आने वाले खर्च को कम करने और गरीब तथा वंचित वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करने का काम पूरा करना अभी बाकी है। डॉक्टर मनमोहन सिंह ने बताया कि राज्यों से कहा गया है कि वे जिला और अधीनस्थ स्तरों पर न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाएं ताकि विचाराधीन मामलों को निपटाया जा सके। साथ ही न्यायिक व्यवस्था के मौजूदा ढांचे को बेहतर बनाने के लिए भी कहा गया है

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