दिल्ली को सीरियल बम विस्फोटों से दहला देने वाले आतंकवादी हमले की शुरुआती जांच में पता चला है कि इसका मास्टरमाइंड मुंबई का कंप्यूटर स्पेशलिस्ट अब्दुल सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर है। वह इंडियन मुजाहिदीन-सिमी की एक सेल का सरगना है। इसके अलावा कयामुद्दीन नामक आतंकवादी का भी नाम सामने आ रहा है।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि तौकीर ही काली शनिवार का मुख्य साजिशकर्ता है। एजेंसियों का यह भी मानना है कि हाल में जयपुर, बेंगलुरु और अहमदाबाद शहरों में हुए सीरियल बम विस्फोटों के पीछे भी उसी का हाथ है। राजस्थान और गुजरात के पुलिस सूत्रों ने बताया है कि उन्हें अब तक आतंकवादियों की टीम के केवल 'प्यादे' हाथ लगे हैं, मुख्य सुत्रधार अब्दुल सुभान उर्फ तौकीर तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पाए हैं।
कौन है अब्दुल सुभान?
32 साल के अब्दुल सुभान को भारत में आतंकवाद का नया हाईटेक चेहरा कहा जा सकता है। वह मुंबई के मस्जिद बांदर का रहने वाला है। खास बात यह है कि वह सिर्फ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में ही सिद्धहस्त नहीं है, बल्कि विस्फोटकों का भी विशेषज्ञ है। उसने आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने में अपनी दोनों तरह की जानकारी का जहरीला कॉकटेल बनाकर बेकसूरों का लहू बहाने में इसका घातक इस्तेमाल किया है।
सुभान ने आतंकवादियों को ट्रेंड करने और जयपुर, अहमदाबाद और सूरत के सीरियल बम विस्फोटों के लिए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार करने में मदद की है। उसे आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैबा ने पाकिस्तान में 2001 में आतंकवाद की ट्रेनिंग दी। उसने मुंबई की तीन सॉफ्टवेयर कंपनियों में काम किया। ताज्जुब की बात यह है कि भारतीय खुफिया एजेंसियां मार्च, 2008 तक सुभान को नहीं जानती थीं।
दिल्ली में हुए बम विस्फोटों के दौरान इंडियन मुजाहिदीन ने जो ईमेल भेजा, वह पहले भेजे गए दो ईमेल की तरह मुंबई से सुभान के ठिकाने से ही भेजा गया। यह मेल भेजने के लिए चेंबूर स्थित कामरान पावर प्राइवेट लिमिटेड के वाई-फाई कनेक्शन का इस्तेमाल किया गया। कामरान पावर प्रा. लि. के मालिक मिस्टर कामत हैं। गुजरात पुलिस द्वारा सूरत में सिमी के ठिकाने पर मारे गए छापों में सुभान बड़ी मुश्किल से बचकर निकल भागा था।
सुभान ने इंडियन मुजाहिदीन की ओर से किए गए अपने आखिरी ईमेल में खुफिया एजेंसियों को यह कहकर बरगलाने की कोशिश की कि अहमदाबाद बम विस्फोटों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए लोग बेकसूर हैं और अमेरिकी नागरिक केन हेवुड मेरा सहयोगी है। संदेह है कि हेवुड के वाई-फाई का ही इस्तेमाल कर सुभान ने अहमदाबाद ब्लास्ट की धमकी दी थी। हेवुड के भारत लौटने से सुभान की साजिश का खुलासा हो गया है। दरअसल सुभान ने सूरत में जो ढेरों बम प्लांट करवाए थे, वे नहीं फटे जिससे उसकी साख पर बट्टा लग गया। दिल्ली विस्फोटों के वक्त किए गए उसके आखिरी मेल से यही लगता है कि वह अपनी क्षमता फिर दिखाना चाहता था।