एनडीए सरकार में विदेश मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने आडवाणी पर विरोधाभाषयुक्त बयान देने का आरोप लगाया है।
चुनावी वर्ष में भाजपा के लिए एक बहस का विषय बन सकता है जसवंत सिंह के अनुसार कंधार जाने का फैसला सीसीएस के बैठक में हुआ था, लगता है आडवाणी उस बैठक को भूल गये।
आपको याद होगा कि अपनी किताब में आडवाणी ने लिखा है कि उनको इस घटना की जानकारी नहीं थी, यानि जसवंत सिंह का कंधार जाने वाली यात्रा, आडवाणी अपने आपको इस घटना से अलग रखना चाहते है ताकी उनकी लौह पुरूष वाली छवि पर आंच न आये।
लेकिन सहयोगी है कि उनको बारबार याद दिलाते रहना चाहते है कि आपको मालुम था कि जसवंत सिंह कंधार जायेंगे। इससे पहले एनडीए संयोजक और तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडीज ने भी आडवाणी के बयान का खंडन किया था। आडवाणी के स्मरण पर चुट्की लेते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता वीरप्पामोईली के अनुसार आडवाणी की यादास्त पर कमजोर है, देश उन पर भरोसा कर सकता है।
पिछले सप्ताह डा. मुरली मनोहर जोशी ने एक साक्षात्कार में कहा था जब तक राजनेता सक्रिय राजनीति में हैं तब तक उनको अपनी आत्म कथा नहीं लिखनी चाहिए क्योंकि वे सभी के प्रति न्याय नहीं कर सकते है। जोशी का ईशारा आडवाणी जी की तरफ है।