उनकी पार्टी के कोटे के मंत्री केन्द्रीय सरकार से इस्तीफा दे देगें, इस्तीफा का कारण पिछले साल राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा बरखास्त किये गये जजों के पुन: बहाली को लेकर है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग(नवाज) में इस विषय पर मतभेद ज्यादा गहरे हो गये हैं।
नावज शरीफ के अनुसार पाकिस्तान मुस्लिम लीग(नवाज) का यह फैसला उस परिपेक्ष्य में आया है जिसमें समझौते के अनुसार 12 मई को गठबंधन सरकार द्वारा जजों की पुन: बहाली का प्रस्ताव राष्ट्रीय ऐसेम्बली में लाना तय था। शरीफ के अनुसार हमारे पार्टी के मंत्री प्रधानमंत्री से मिलकरउनको अपना इस्तीफा सौंप देगें। शरीफ के अनुसार लंदन में आसिफ जरदारी के साथ तीन दिनों के वार्ता के बावजूद नतीजा नहीं निकला। गठबंधन नहीं तोड़ने की मजबूरी दिखाते हुए शरीफ का कहना था कि उनकी पार्टी गठबंधन की सरकार को बाहर से समर्थन देती रहेगी।
पीपीपी ने इन अफवाहों को खारिज कर दिया कि गठबंधन टूटने के कगार पर है। पीपीपी के प्रवक्ता बाबर के अनुसार मंत्री के इस्तीफे के बावजूद खाली मंत्री पद नहीं भरे जायेगें। सिर्फ वित्तमंत्री के पद पर किसी की नियुक्ति हो सकती है क्योंकि बजट सत्र शूरू होने वाला है।
बाबर के अनुसार बातचीत और आपसी विश्वास के जरिये, समस्या का समाधान ढूंढ लिया जायेगा। जजो की बहाली के मसले पर कुछ समय के लिए रूकावट आ गई है। इसे दूर करके लोकतांत्रिक प्रक्रिया जारी रखने में मदद मिलेगी.
इसके बावजूद पीपीपी गठबंधन टूटने की स्थिति की भी तैयारी कर रहा है। एमक्यूएम से बातचीत कर रही है। एमक्यूएम फरवरी 18 के चुनाव में राष्ट्रपति के पार्टी की सहयोगी थी और चुनाव बुरी तरह हार गई थी। अगर जरदारी एमक्यूएम से समझौता करते हैं, और पीएमएल (नवाज) सरकार से समर्थन वापस ले लेती है तो पाकिस्तान के संसद में बहुमत के लिए 13 सीटो की जरूरत पड़ेगी। प्रधानमंत्री ने एमक्यूएम के नेता से बातचीत भी की है।
नवाज शरीफ और जरदारी के बीच बढ़ती दूरी परवेज मुशर्रफ को मजबूत करती जा रही है। मुशर्रफ जितना ही मजबूत होंगे पाकिस्तान में लोकतंत्र उतना ही कमजोर होगी। पहली नजर में जरदारी ज्यादा दोषी दिख रहे हैं। क्या पाकिस्तान में के किस्मत में लोकतांत्रिक सरकार नही है ? अगर यह गठबंधन टूटती है तो यह मानना ही पड़ेगा।