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Wed, 14 May 2008 14:15:00

घुसपैठियों का संकट और सरकार

खुफिया विभाग के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान में 40 आतंकवादी के प्रशिक्षण शिविर काम कर रहे हैं। भारत को इस बात का भय सता रहा है कि आने वाले दिनो में जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि होने वाली है
नियंत्रण रेखा

केन्द्र सरकार को इस बात की आशंका है कि आने वाले दिनों में सीमा पार से घुसपैठियों की संख्या बढ़ने वाली है।

खुफिया विभाग के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान में 40 आतंकवादी के प्रशिक्षण शिविर काम कर रहे हैं। भारत को इस बात का भय सता रहा है कि आने वाले दिनो में जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि होने वाली है। वजह साफ है राज्य में चुनाव सिर पर है, और अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है , आतंकवादी अपनी उपस्थिति जताना चाहते है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसमें फैसला लिया गया कि सीआरपीएफ और बीएसएफ की और कम्पनियां कश्मीर भेजी जाये। रेडियो पर मिले संदेश और आतंकवादियो से पूछताछ के बाद पता चला है कि पाकिस्तान में कम से कम 18 प्रशिक्षण शिविर है और पाकिस्तान शासित कश्मीर में 20 आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर है। जैसे ही नियंत्रण रेखा पर बर्फ पिघलनी शुरू हुई सैकड़ो जेहादी जम्मू और कश्मीर में घुसने के लिए घात लगा के बैठे हैं।

एक अनुमान के अनुसार राज्य में 1200 आतंकवादी सक्रिय है। सांबा क्षेत्र में जो सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुआ वह इस बात की पुष्टि करता है कि आतंकवादी सीमा पार कर वापस आने के लिए बेचैन हैं।

सेना प्रमुख जेनरल दीपक कपूर के अनुसार अप्रैल तक स्थिति कमोवेश नियंत्रण में थी। लेकिन जैसे-जैसे बर्फ पिघलना शुरू हुआ है वैसे-वैसे प्रयास तेज हो रहे है। दीपक कपूर और रक्षा सचिव विजय सिंह हुसैनवाला सीमा के अग्रिम चौकी के दौरे पर थे। पीएमओ में जो बैठक हुई थी उसमें गृह सचिव मधुकर गुप्ता और सीआरपीएफ प्रमुख बी के जोशी को निर्देश दिया गया था  कि जल्द से जल्द इस तरफ ध्यान दें। निर्णय यह भी लिया गया कि बीएसएफ सांबा क्षेत्र में एक अतिरिक्त बटालियन (100) तैनात करेगा।

आपको बता दे कि सेना नियंत्रण रेखा पर नजर रखती है, उसके  बाद पहली पंक्ति की सुरक्षा बीएसएफ देखता है,उसके साथ आईबी के सुरक्षी कर्मी भी होते है। उसके बाद कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेवारी सीआरपीएफ संभालती  है।

इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बाद यदि घुसपैठिये सीमा पार कर जाते है तो इससे लगता है कि हमारे जवान या अधिकारी उसकी मदद करते है अगर ऐसा नही होता है तो, वहां के स्थानीय निवासी करते है। कोई न तो कोई करता है, वर्ना आतंकवादी इतनी सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर कैसे आ जाते हैं।


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