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Fri, 16 May 2008 15:18:00

विस्फोट के साये में वार्ता

भारत के विदेश सचिव शिव शंकर मेनन के इस बयान पर भी कोई प्रतिक्रिया नही दी जिसमें उन्होंने कहा था कि वार्ता में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुख रूप से छाया रहेगा ।
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी

भारत और पाकिस्तान इस बात को सुनिश्चित करना चाहते है कि अगामी 20 मई को होने वाली वार्ता पर जयपुर बम विस्फोट की छाया न पड़े। क्या ऐसा संभव है,भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी अगामी 20 मई को पाकिस्तान के दौरे पर जा रहे है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक ने  इन अफवाहों पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया जिससे यह कहा जा रहा है कि इस बम विस्फोट में पाकिस्तान का हाथ हो सकता है, जिसमें 60 से ज्यादा लोगो की मृत्यु हुई है।
अपने सप्ताहिक संवादाता सम्मेलन में उनका कहना था की अभी तक सरकारी तौर पर भारत सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारत के विदेश सचिव शिव शंकर मेनन के इस बयान पर भी कोई प्रतिक्रिया नही दी जिसमें उन्होंने कहा था कि वार्ता में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुख रूप से  छाया रहेगा ।

प्रवक्ता से अनुसार चौथे दौर की जो वार्ता होगी उसमें, आतंकवाद, और अवैध दवा व्यापार और अन्य 8 मुद्दे शामिल है जिस पर बातचीत होनी है।

सादिक के अनुसार आतंकवाद दोनों देशों के लिए खतरा है इस पर दोनों देशों को मिलकर काबू पाना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने घटना पर शोक व्यक्त किया है।

भारतीय पक्ष भी इस बात को स्वीकारता है कि अभी तक इस बात के कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि जयपुर विस्फोट में पाकिस्तान का हाथ है। यह  तो समझने की बात है कि वार्ता होगी तब भारतीय पक्ष कहेगा ही कि पाकिस्तान अपने भूमि से आतंकवादी घटनाओं को बढ़ावा न दे।

दोनो पक्षों के बीच अंतिम वार्ता अक्टूबर 2007 में हुई थी तब से मंत्री स्तर पर कोई वार्ता नही हुई है। मुखर्जी का दौरा दोनो देशों के रिश्ते को सामान्य करने में मदद करेगा। पाकिस्तान को इस दौरे से काफी आशायें है कि वार्ता के बाद कई क्षेत्रो में समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी हो सकते है।

यदि जयपुर बम विस्फोट के तार पाकिस्तान से जुड़ते हैं तो, विदेश मंत्री इस्लामाबाद जायेंगे, जिस तरह से जिस तरह से आम लोगो का खून बह रहा है, उसको देखकर तो लगता है कि वार्ता होगी भी तो सिर्फ वार्ता के लिए। किसी भी तरह के समझौते की संभावना धूमिल लगती है।


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