सरकार के लिय़ॆ 123, समझौता करने का सही समय आ गया है। सीपीइ के नेता ए बी बर्धन के हालिया बयान की वाम दल सरकार से समर्थन वापस तो ले सकते है पर उसको गिरायेगे नही। यदि सरकार समझौते के लिये आगे जाती है तो भी। यह बयान सरकार के लिये एक नया दरवाजा खोलती है। सीताराम येचुरी अभी भी वायदा करने से मुकर रहे है।पर येचुरी का यह कहना कि उन्होने वर्धेन का वह टॆलिवीजन वाली परिचर्चा नही देखी है विश्वास करने योग्य नही है। प्रकाश कारत का यह कहना की पार्टी के विचार मे कोई परिवर्तन नही आया है।वर्तमान मे जो द्रश्य है उसके अनुसार वाम दल सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे है। अगर सरकार से समर्थन वापस लेते है ,पर भाजपा के साथ सदन मे मतदान नही करते है तो सरकार नहि गिरेगी और अल्पमत की सरकार देश मे चलती रहेगी | युपीए की सरकार अगले कुछ महीने तक चलती रहेगी।
सरकार ( IAEA) के साथ समझौता कर सकती है। उसके बाद सरकार उन देशो के पास जा सकती है जिनके पास युरेनियम है और जिनकी शर्त है कि जबतक आप ( IAEA) के साथ नही कर सकते है तबतक आप से कोई वार्ता नही हो सकती है। रुस , फ्रांस, जर्मनी भी शामील है। घरेलु राजनीति के विरोध के चलते यह समझौता नही हो पा रहा है। भाजपा का विरोध समझ से परे है। कलाम ने भी सन्धि का समर्थन किया है उनका कहना है कि सन्धि देश के हित मे है। भारत के परमाणु विरादरी भी समझौते के समर्थन मे खरी है।
देश का राजनैतिक वर्ग अभी भी समझौते से ना नुकुर कर रहा है। भारत के पास युरेनियम नही रहने की वजह से परमाणु बिजली घर बन्द होने के कगार पर है। अगर भारत ने अभी भारत अमेरिका परमाणु सन्धि पर दस्तख नही किया तो आगे काफी मुश्किल मे पर जायेगा।
समझौता करना एक विवेक युक्त कदम होगा। समझौता करके भी अपने बिरोधियो को जबाब दे सकती है। भाजपा को भी आपने राजनीतिक फायेदे से ह्टकर देश हित मे सन्धि का समर्थन करना चाहिए। क्या यह हो पायेगा।