भारत और मिस्र ने संयुक्त राष्ट्र को अधिक लोकतांत्रिक बनाने का आह्वान किया है। मिस्र की यात्रा पर गए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने वहां के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से बातचीत में गुटनिरपेक्ष आंदोलन को और मजबूती देने तथा आपसी व्यापार बढ़ाने पर भी जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्य संख्या में बढ़ोतरी और संयुक्त राष्ट्र के अधिक लोकतंत्रीकरण की संयुक्त मांग से यह स्पष्ट है कि भारत और मिस्र आपसी समझ के साथ विश्व मामलों में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्रीय वैश्विक मामलों में उनकी समझ एक सी है और आपसी संबंधों का आर्थिक और व्यापार संबंधों से कहीं और आगे ले जाना चाहते हैं।
दोनों देशों ने सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि, पैट्रो रसायन और ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों नेताओं की बातचीत के दौरान विकासशील देशों में निरंतर विकास को सुनिश्चित करने के लिए जलवायु परिवर्तन की प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई। बाद में शाम को काहिरा में श्री मुखर्जी ने वहां के प्रधानमंत्री के साथ शिष्टमण्डल स्तर की बातचीत की और भोज में शामिल हुए।
भारत और मिस्र के संबंध हाल के वर्षों में बहुत कगार हुए हैं। क्योंकि दोनों देशों के शीर्ष व्यापारी उद्योगपतियों के मेलझोल के साथ ही बहुत से क्षेत्रों में वे एक दूसरे से सहयोग कर रहें है। विदेश मंत्री प्रणवमुखर्जी और मिश्र नेताओं के बीच हुई बातचीत में विपक्षी, क्षेत्रीय और वेश्विक मुद्दे छाये रहें। विशलेषकों का मानना है कि विदेश मंत्री का यह दौरा इस वर्ष अप्रैल में नई में हुए अफ्रीका सम्मेलन और उनके इस वर्ष की उमांग सउदी अरब और संयुक्त अरब इराक की यात्रा के मद्देनजर इस क्षेत्र के देशों में वे संबंध मजबूत करने की प्रक्रिया की एक कड़ी है।