चार वर्ष पुरानी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से समर्थन वापसी की वाम दलों की धमकियों के बावजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जापान के टोक्यो में समूह आठ की बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बुश के साथ परमाणु करार पर विचार-विमर्श करेंगे।
विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने बताया कि दोनों नेताओं की बैठक के दौरान परमाणु समझौते पर चर्चा होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री बुश से भारत के लिए परमाणु आपूतिकर्ता 45 देशों के समूह से अनिवार्य छूट दिलाने का मुद्दा उठाएंगे, मेनन ने हां में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वास्तव में दोनों देशों के बीच जुलाई 2005 के समझौते तहत अमेरिका इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि वह भारत को एनएसजी से आवश्यक छूट दिलवाएगा।
मेनन ने कहा कि जी-8 की बैठक के दौरान डॉ. सिंह को एनएसजी के अन्य देशों से बातचीत करने का मौका मिलेगा। इन नेताओं से द्विपक्षीय बातचीत में प्रधानमंत्री देश को छूट दिए जाने के मसले पर बातचीत कर सकेंगे।
अमेरिकी सांसद गैरी एक रमैन की इस टिप्पणी पर कि परमाणु करार के लिए समयसीमा बीतती जा रही है, विदेश सचिव ने कहा, 'समयसीमा के बारे में मैंने पहले भी कुछ नहीं कहा है और अब भी मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा।' उन्होंने कहा कि समझौता क्रियान्वित करने से पहले बाकी तीन चरणों को पूरा करने के लिए अब भी पर्याप्त समय है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सुरक्षा उपायों पर समझौते के अलावा भारत को एनएसजी से मंजूरी तथा अमेरिकी संसद से परमाणु करार पर स्वीकृति हासिल करनी है।