भारत ने जम्मू-कश्मीर के बारे में पाकिस्तान के बयान को भारत के अंदरूनी मामलों में खुलेआम दखल बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह के बयान से दोनों देशों के बीच चल रही समग्र वार्ता प्रक्रिया के लिये उचित माहौल बनाने में मदद नहीं मिलेगी।कश्मीर की स्थिति पर पाकिस्तान के बयान को गंभीरता से लेते हुए भारत ने कहा है कि इससे शांति वार्ता प्रभावित हो सकती है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा, "मैंने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री और उनके मंत्रालय के प्रवक्ता के बयानों को देखा है. ये सीधे-सीधे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है।"
उनका कहना था, "इस तरह के बयानों से जम्मू-कश्मीर में स्थिति सुधारने में मदद नहीं मिलती और ना ही इससे द्विपक्षीय शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।" विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का असर शांति वार्ता पर पड़ सकता है।उन्होंने बताया कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री मख़दूम शाह क़ुरैशी ने सोमवार को दिए गए बयान में हुर्रियत नेता शेख अब्दुल अज़ीज़ की मौत को 'शहादत' बताते हुए इसकी निंदा की थी।
उन्होंने कहा था, "पाकिस्तान की सरकार भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों पर भारी बल प्रयोग की निंदा करती है। हम कश्मीर में बिगड़ते हालात पर बेहद चिंतित हैं जहाँ कश्मीरी लोगों के जान-माल की क्षति हो रही है।" पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने 'निर्दोष कश्मीरियों के ख़िलाफ़ अविलंब हिंसा रोकने' की मांग की थी।ग़ौरतलब है कि अमरनाथ ज़मीन आवंटन के मुद्दे पर जम्मू में आंदोलन चल रहा है। इसके कारण कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर यातायात बाधित होने की ख़बर है। जबकि कश्मीर के कुछ संगठनों का कहना है कि जम्मू के लोगों ने उनकी आर्थिक नाकेबंदी की है। इसी के विरोध में व्यापारी संगठनों को मुज़फ़्फ़राबाद मार्च का आयोजन किया था। इसी मार्च के दौरान सेना के सथ झड़प में कुछ लोगों की मौत हो गई थी जिनमें हुर्रियत के नेता शेख़ अज़ीज़ भी शामिल थे।