अगामी रविवार से शुरू हो रहे नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड के भारत दौरे में आपसी महत्व के मसलों के अलावा नेपाल की ओर से भारत में प्रवेश करने वाली नदियों के समुचित नियंत्रण के मसले पर चर्चा की जाएगी। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड भारत-नेपाल संधि की समीक्षा के मसले पर भी चर्चा करेंगे।
हालांकि प्रधानमंत्री के तौर पर प्रचंड की पहली भारत यात्रा की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनयिक सूत्रों ने कहा कि नेपाल की विभिन्न नदियों पर भारत द्वारा बनाए जा रहे बांध और अन्य परियोजनाओं के लिए भेजे गए भारतीय इंजीनियरो की समुचित सुरक्षा नेपाल सरकार सुनिश्चित करे। भारतीय कर्मचारियों को माओवादियों से सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ता है।
प्रचंड ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार चीन का दौरा ओलिंपिक खेलों के समापन के अवसर पर किया था, जिसे लेकर भारत और नेपाल के राजनीतिक हलकों में व्यापक विवाद पैदा हुआ था। इन पर टिप्पणी करते हुए प्रचंड ने कहा था कि उनका प्रथम भारत दौरा राजनीतिक होगा जबकि चीन दौरा महज ओलिंपिक खेलों के समापन समारोहों में भाग लेने के लिए था।
प्रचंड के भारत दौरे में नदी मैनिजमंट के मसले पर समग्रता में चर्चा की जाएगी और इसके लिए ठोस कार्यक्रमों की रूपरेखा भारत की ओर से पेश की जाएगी। दोनों देशों ने 1954 में कोसी जल प्रबंध के लिए एक संधि की थी जिसकी समीक्षा की भी मांग भारत की ओर से की जा सकती है। इन मसलों पर नेपाल के प्रधानमंत्री से जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज चर्चा करेंगे।