सरकार ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में दुनिया के देशों से व्यापारिक सहयोग के प्रयास शुरू कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने नई दिल्ली में कहा कि हालांकि, वास्तविक परमाणु सहयोग, अमरीका के साथ एक - दो - तीन समझौते जैसे द्विपक्षीय करार होने के बाद ही शुरू होगा। मगर, भारतीय परमाणु बिजली निगम ने इस सिलसिले में अमरीकी कंपनियों के साथ प्रारम्भिक बातचीत शुरू कर दी है। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार फ्रांस और रूस जैसे दूसरे मित्र देशों से भी द्विपक्षीय समझौते करने के लिए कदम उठा रही है।
प्रवक्ता ने कहा कि एक -दो - तीन समझौते के प्रावधानों के आधार पर अमरीका से परमाणु टेक्नोलॉजी और सामग्री खरीदने के भारत के इरादे के बारे में वहां की सरकार को बता दिया गया है। इस बीच, हॉलैंड ने कहा है कि परमाणु अप्रसार के बारे में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा भारत की वचनबद्धता दोहराए जाने के बाद उसकी आशंकाएं दूर हो गई हैं।
लेकिन ऑस्टेरलिया के विदेश मंत्री स्टीफन स्मिथ ने कहा है कि परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत न करने वाले देशों को यूरेनियम न बेचने की उनके देश की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन वह दोहरे इस्तेमाल की हर सामग्री के बारे में अलग से विचार कर सकता है।
भारत में अमरीकी राजदूत डेविड मलफोर्ड ने कहा है कि अगर भारत परमाणु परीक्षण करता है तो उनका देश कानून के तहत भारत से असैन्य परमाणु सहयोग बंद कर सकता है लेकिन ऐसा परीक्षण के औचित्य पर चर्चा के बाद ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक सार्वभौम राष्ट्र के रूप में भारत को परमाणु परीक्षण का पूरा अधिकार है। भारत और विश्व के लिए ऐतिहासिक कदम है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने अमरीका से इस क्षेत्र में बातचीत प्रारंभ किया है और यह निष्कर्ष किया जा सकता है कि अमरीकी संसद में आखिरी प्रक्रिया जल्दी खत्म होगा। परंतु हमें इस बात का भी ध्यान देना है कि अमरीका के अंदर इस समझौता के विरोध करने वाले कई लोग हैं और देखना है कि अगले दो दिन अमरीका के संसद में ये बहस किस प्रकार से होगा। पर अंत में आशा किया जा सकता है कि सितम्बर 26 से पहले अमरीका की संसद इस समझौते को मंजूरी जरूर दे देगा।