एम्स के साथ डॉ. वेणुगोपालन का 40 साल का रिश्ता है जो जल्दी ही खत्म होने वाला है। 2 जुलाई 2008 को वेणुगोपालन सेवानिवृत हो रहे है। व्यक्तिगत तौर पर वेणुगोपालन को लगता है इतने कम समय में वे ज्यादा कुछ तो नहीं कर पायेंगे परन्तु जो लोग उनके साथ खड़े थे उनका मनोबल तो बढ़ेगा ही। फैसला साबित करता है कि व्यक्तिगत हित से बढ़कर संस्था का हित होता है।
वेणुगोपालन के अनुसार उन्हें संसद, न्यायलय और जितनी भी संस्था है उन पर उनका पूरा विश्वास है पर व्यक्तिगत स्वार्थ के साधने के लिए संस्था का दुरूपयोग नही करना चाहिए। संसद ने जिस तरह से आनन-फानन में कानून बनाकर उनको हटाने का फैसला किया वह अपने आप में सोचनीय विषय है। वेणुगोपालन के अनुसार प्रधानमंत्री ने भी इस मामले में हस्तक्षेप नही किया। फैसला सच्चाई का बयान करती है। यह ऐतिहासिक फैसला है, इससे व्यक्तियों को सीख लेने की जरूरत है। कार्य भार संभालने के बाद वेणुगोपालन ने कहा कि इस फैसले से मंत्री को भी सीख मिली होगी। उन्हें भी कानून का महत्व समझ में आ गया होगा। इस तरह के निर्णय में व्यक्तिगत, राग और द्वेष का कोई स्थान नही है।
डॉ. वेणुगोपालन 3 मई 2003 को एम्स के निदेशक के पद भार ग्रहण किया था। कोटा के विरूद्ध जब डाक्टरों का प्रदर्शन हुआ तो रामदास ने आरोप लगाया था कि वेणुगोपालन आंदोलन के समर्थकों की मदद कर रहे है।
पिछले चार वर्षों से मंत्री हमें परेशान करने पर तुले है, अब उनकी नजर अमिताभ बच्चन और शाहरूख खान पर है। बड़े लोगो को परेशान करने से अच्छा होगा कि मंत्री अपने कार्यों पर ध्यान दें। जो लोग वेणुगोपालन की क्षमता पर शक कर रहे हैं उन्हें पता होना चाहिए जब उनका जन्म भी नही हुआ था तब से वे वेणुगोपालन शल्य चिकित्सा कर है, वेणुगोपालन का इशारा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री के तरफ है। यही उदाहरण काफी है कि वेणुगोपालन की क्षमता और योग्यता को बताने के लिए जब उच्च पद पर बैठे व्यक्ति शुद्ध राजनीति पर उतर आते है तो अपना तो बुरा करते है सारे समाज का भी ऐसा नुकसान कर जाते है जिसका भरपाई करना मुश्किल होता है। डॉ. रामदास जो भारत के स्वास्थ्य मंत्री है इसका सही और सटीक उदाहरण है।