उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक तरह का 'भ्रष्टाचार' है, जिसको रोका जाना चाहिए।
उन्होंने कहा- कुछ पार्टियां धर्म और जाति का इस्तेमाल वोट हासिल करने के लिए तुरुप के पत्ते के रूप में कर रही हैं। फैसला लोगों को करना चाहिए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए दक्षिण कन्नड़ में प्रचार के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी ने चुनाव में लोगों को लुभाने के लिए जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा कर पाना मुमकिन नहीं है।
वार्ता के मुताबिक, देवगौड़ा ने कहा कि केंद्र को चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए काले धन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए साहसिक कदम उठाना चाहिए। इसके लिए अनिवार्य मतदान को कड़ाई से लागू करने की तुरंत जरूरत है। केंद्र सरकार को चुनाव प्रणाली की समीक्षा और उसमें सुधार के लिए विधि विशेषज्ञों व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए। सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सहयोग करें।
देवगौड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी द्वारा उठाए गए कुछ कदमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे कुछ प्रगति तो अवश्य हुई है लेकिन सरकार को चुनाव में काले धन के इस्तेमाल पर रोक के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जेडी(एस) के चुनावी घोषणा पत्न को जनहितकारी और किसान हितैषी बताते हुए कहा कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी ठेके पर काम करने वाले श्रमिकों को चेक के जरिए भुगतान, गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों को 850 रुपये के सालाना प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का बीमा कवर और बेरोजगार युवकों को स्वरोजगार के लिए बैंक कर्ज के लिए कानून बनाएगी।