वह मनमोहन सरकार को समर्थन देने की नीति की समीक्षा करें। इस मुद्दे पर वामदलों की 23 मई को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में विचार किया जाएगा।
महासचिव ए. बी. बर्द्धन ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के बाद कहा कि हमारे समर्थक हमसे पूछ रहे हैं कि यूपीए सरकार को समर्थन देने का आखिर क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर केवल सीपीआई फैसला नहीं कर सकती बल्कि सभी वामपंथी दलों को मिलकर फैसला करना होगा।
गौरतलब है कि भारत-अमरीका परमाणु सहयोग समझौते के बारे में सत्तारुढ़ गठबंधन और वामदलों की समिति की 28 मई की बैठक के पहले 23 मई को वामदलों की बैठक होने वाली है।
परमाणु समझौते के बारे में भाकपा के विरोध को दोहराते हुए बर्द्धन ने प्रधानमंत्नी की इस सलाह को भी खारिज कर दिया कि पूर्व राष्ट्रपति कलाम द्वारा इस समझौते का समर्थन करने पर वामपंथी दल गौर करें।
सरकार पर निशाना साधते हुए बर्द्धन ने कहा कि महंगाई से जनता की कमर टूट रही है और वित्त मंत्री मुद्रास्फीति के आंकड़ों में मीन मेख निकाल कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चिदंबरम ने 26 अप्रैल को खत्म हुए सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर के 7.57 प्रतिशत से 7.63 प्रतिशत पर पहुंचने को मामूली बढ़ोतरी बताया था।
इसके अलावा बर्द्धन ने 25 जिंसों के वायदा कारोबार पर रोक लगाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी केवल चार जिंसों पर वायदा कारोबार रोका है लेकिन इसकी संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है।