अंतरराष्ट्रीय संधियों को घरेलू सत्ता के खिलवाड़ से बचाने की वकालत करते हुए संघ ने कहा कि विश्व मंच पर देश की प्रतिष्ठा को कायम रखना जरूरी है।
संघ ने अपने मुखपत्र के माध्यम से लेफ्ट पर आरोप लगाया है कि वह परमाणु मुद्दे पर चीन के हितों को पोषण कर रहा है। इसी मकसद के तहत वह यूपीए सरकार को ब्लैकमेल कर रहा है। संघ ने कहा अब यह सही मौका है कि मनमोहन को दूसरे राष्ट्रों के सामने हंसी का पात्र बनने के बजाय लेफ्ट से लंबे समय से चली आ रही बातचीत खत्म कर देनी चाहिए या फिर परमाणु समझौते को ही समाप्त घोषित कर देना चाहिए।
पत्र के संपादकीय में कहा गया है कि भारत को पिछले तीन साल में बडे राजनयिक झटके झेलने पडे हैं क्योंकि सरकार को हर बार लेफ्ट के सामने प्रस्तावित 123 समझौते के हर कदम की सफाई देनी पड़ती है। सरकार को आशंका है कि समय खत्म हो रहा है। अमेरिका ने जून की समय सीमा दी हुई है। सरकार को लगता है कि 123 समझौते के मार्फत भारत को जो निगरानी उपाय करने हैं वे देश की उम्मीदों के मुताबिक हैं। लेकिन लेफ्ट को इसकी चिंता नहीं है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी रह रहकर जाहिर करती रही है कि उसका नीतिगत दृष्टिकोण बाहरी बातों से संचालित होता है। संघ ने कहा 'समस्या यह है कि यूपीए परमाणु समझौते की खातिर सरकार को दांव पर लगाने को तैयार नहीं है। लेफ्ट इस बात को बेहतर समझ गया है और वह सरकार को हर कदम पर ब्लैकमेल कर रहा है।'