अर्जुन सिंह ने अक्सर नेहरू गांधी परिवार का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया है। ऐसा करते वक्त कांग्रेस पार्टी को भी नुकशान पहुंचाया। नरसिंह राव सरकार के शासन के अंतिम वर्षों में कांग्रेस पार्टी का विभाजन किया जिसमें कांग्रेस के नेतृत्व में एक दलीय सरकार की स्थापना का अध्याय खत्म हो गया।
पिछले एक महीने से उनका प्रयास था कि पार्टी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करे। इससे वर्तमान प्रधानमंत्री की कद में कमी और राहुल गांधी के जरिये अपना ग्राफ ऊपर करने की कोशिश करते रहे। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी में चापलूसों की कोई जगह नहीं है। इससे वर्तमान यूपीए गठबंधन की छवि धूमिल तो हुई साथ ही साथ प्रधानमंत्री भी परेशान दिखने लगे।
पिछले सप्ताह सोनिया गांधी और अर्जुन सिंह जब एक कार्यक्रम में साथ-साथ थे पर एक दूसरे से नजर चुराते रहे। इस कार्यक्रम में सोनिया गाँधी ने शिक्षा के क्षेत्र में जो हो रहा है उसके लिए प्रधानमंत्री की भूरी-भूरी प्रशंसा की पर सिंह का नाम बिल्कुल नही लिया। यह एक राजनीतिक मुद्दा हो सकता है पर प्रधानमंत्री का नाम लेना बिल्कुल सही था। अर्जुन सिंह अपने पूर्ववर्ती मुरली मनोहर जोशी के के तरह अपने समर्थकों खुश करने में लगे हैं। अर्जुन सिंह के खाते में एक महत्वपूर्ण सफलता है वह ओबीसी को उच्चतम शिक्षा संस्थानों में आरक्षण दिलवाना।
अर्जुन सिंह का यह बयान कि जब तक जिंदा हूँ नेहरू गांधी परिवार के प्रति समर्पित रहूंगा। चार साल का मंत्रीमंडलीय कार्य यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री और पार्टी को परेशान करने के अलावा कुछ नहीं किया है। अगर कांग्रेस अर्जुन सिंह से पिंड छुड़ाना चाहती है तो कम से कम उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय से अलग कर किसी और मत्री को दे दे। नहीं तो अर्जुन सिंह का इतिहास है, अपने फायदे के लिए पार्टी का नुकशान करते आ रहे हैं। हो सकता है सरकार में रहकर देश का नुकशान न कर दे ?