तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके के संरक्षक एम करूणानीधि जो अगले महींने 85 साल के हो रहे हैं विधान सभा में अपने मंत्रियों और विधायकों से भवनात्मक अपील की कि उनकी अंतिम इच्छा है कि सभी राजनीतिक दलों से दोस्ताना संबंध बने इसमें एआईएडीएमके भी शामिल है ।
करूणानीधि जब विधान सभा में अपनी मृत्यु से पहले की इच्छा का जिक्र कर रहे थे तो उनका ईशारा एआईएडीएम के सुप्रीमों जयललिता के तरफ था। भाषण के दौरान एआईएडीएमके के सदस्य शांति पूर्वक उनका भाषण सुन रहे थे जबकि डीएमके के सदस्य रो पड़े।
उनका यह अपील चार दशकों से चली आ रही दोनो द्रवीयन पार्टी के कटु सम्बन्धों को दूर करने का है। इसमें एआईएडीएमके के संस्थापक एमजी रामचंद्रन और बाद में जयललिता के साथ उनके खुद के सम्बन्ध भी शामिल है।
दोनो पार्टियों के बीच सम्बन्ध इतने खराब थे कि विधान सभा के सदस्य रहने के बावजूद जयललिता ने विधान सभा के सत्र में भाग लेने से मना कर दिया था। उसी तरह करूणानीधि भी भाग लेने से मना कर दिया था। जब जयललिता मुख्यमंत्री थीं। दोनो पार्टियों के बीच सामाजिक तौर पर भी कोई रिश्ता नहीं है।
करूणानीधि की सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल को विगत 11 मई को पूरा कर लिया है। इस अवसर पर करूणानीधि का कहना था कि हमें इस बात का संतोष है कि हम सभी राजनीतिक दलो के साथ दोस्ताना सम्बन्ध बनाने में कामयाब हुए है। मेरी इच्छा है कि हमारी पार्टी के साथ किसी भी पार्टी की दुश्मनी न हो।
क्या ऐसा हो पायेगा, जयललिता मानेगी पुराने इतिहास को देखते हुए यह बिल्कुल नहीं लगता। पर भारतीय राजनीतिक में कुछ भी संभव है, यह भी संभव हो सकता है।