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Thu, 15 May 2008 15:42:00

भाजपा का यूपीए सरकार पर प्रहार

आतंकवादियों को सजा देने के लिए एक अलग और सख्त कानून की जरूरत है। टाडा और पोटा इस तरह के कानून मुहैया कराते थे
भाजपा का चुनाव चिन्ह

इस साल देश में कई राज्यों के विधान सभा चुनाव होने हैं। भाजपा कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही यूपीए सरकार पर आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद पर विफल रहने का आरोप लगाती रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकार दोनो मोर्चो पर नाकामयाब  रही है।

विस्फोट के एक दिन बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, राजनाथ और अरूण जेटली ने बम विस्फोट की निंदा करते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि देश में चारो तरफ से यह अवाज उठ रही है कि केन्द्र सरकार आतंकवाद के प्रति नरम रवैया अपना रही है। आडवाणी ने जहां पर सरकार वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है। वही पर जेटली जो कर्नाटक चुनाव के सिलसिले में हुबली में है उनका कहना है कि सरकार आतंकवादी घटनाओं को रोकने में बिल्कुल असफल रही है।

आडवाणी ने इस बात पर जो दिया है कि देश में पोटा जैसे कानून की सख्त जरूरत है। आडवाणी ने आतंकवाद के मुद्दे पर यूपीए की विफलता का सिलसिले वार ढंग से ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि 2005 दिल्ली में, जम्मू अयोध्या, (2005), वाराणसी (2006), बंग्लौर (2005) ,मुम्बई (2006) ,मालेगांव (2006) ,हैदराबाद (2006) और रामपुर (2008) जैसे आतंकवादी घटनाएं शामिल है।

भाजपा जो पूरी तरह चुनावी मुद्रा में आ चुकी है उसके महासचिव अरूण जेटली ने देश के सामने बहस के लिए प्रमुख मुद्दे रखे है :

आतंकवाद से लड़ने के लिए एक राष्ट्रीय नीति होनी चाहिए न कि एक कमजोर वोट बैंक की नीति हाल ही में जितने आतंकवादी हमले हुए है। उसके पीछे हूजी जो बंग्लादेशी आतंकवादी संगठन है, और उसको आईएसआई की भी सहयोग का हाथ है। इन दोनो ने मिलकर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर योगदान दिया है। इसमें अवैध रूप से घुसपैठिये बंग्लादेशी समस्या को और बढ़ा रहे है। राजनीतिक व्यवस्था को अवैध घुसपैठिये की समस्य़ा को समझने की जरूरत है न कि तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने की।

आतंकवादियों को सजा देने के लिए एक अलग और सख्त कानून की जरूरत है। टाडा और पोटा इस तरह के कानून मुहैया कराते थे। कुछ राज्यों में ऐसे कानून है उनमें पहले महाराष्ट्र फिर गुजरात और राजस्थान ने ऐसा कानून बनाया है।

गुजरात सरकार ने तो कानून को कानूनी जामा पहना दिया है पर राषट्रपति ने इस कानून को अनुमोदित नही किया है। सरकार ऐसा कानून जल्द से जल्द राष्ट्रीय स्तर तो बनाये ही साथ ही साथ, गुजरात और राजस्थान सरकार द्वारा बनाये गये कानून को अपनी सहमति दे। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति के तरीके से हमे आतंकवाद से जूझ रहे देशों को यह बताने की जरूरत है कि आतंकवाद का केन्द्र बिन्दु पाकिस्तान है। जब तक उसको अलग-थलग नही किया जयेगा तब तक विश्व आतंकवाद से मुक्त नही हो सकता है।

अफजल गुरू को फांसी में हो रही देरी इस बात की ओर संकेत करती है कि केन्द्र सरकार कठोर निर्णय लेने से हिचकती है या लेना नहीं चाहती है। सरकार को जल्द से जल्द निद्रा से जागना होगा और आतंकवाद से लड़ने के लिए मानसिक तौर पर कठोर बनना पड़ेगा। कल राष्ट्रपति भवन में अलंकरण समारोह में एक सेना अधिकारी की विधवा जब फूट- फूट कर रो रही थी तब, प्रधानमंत्री के पत्नी के आंखों में आंसू छलक आयी थी, क्या प्रधानमंत्री अभी भी आतंकवाद के विरूद्ध कोई कठोर कदम उठायेंगे या यूं ही दर्द के आंसू छलकती रहेगी ?


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