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Fri, 16 May 2008 09:07:00

असम में उग्रवादियों का हमला

दीमा हालम दाओगाह’ संगठन के प्रवक्ता फाइफांग दिमसा का कहना है कि, “हमारे दर्जनभर साथी सुरक्षा बल द्वारा मारे गए हैं। इसलिए हमने भी युद्ध विराम की पेशकश को वापस ले लिया है।”
असम

असम में दीमा हलाम दाओगाह ज्वैल गारलोसा गुट के संदिग्ध उग्रवादियों ने उत्तरी कछार पर्वतीय जिले में कुमरांगशू थाने के अंतर्गत कुरमिंग लांगशू इलाके में कम से कम दस ट्रक डाईवरों और एक सहायक की गोली मार कर हत्या कर दी। उग्रवादियों ने सीमेंट से लदे चार ट्रकों को भी आग लगा दी। पुलिस के हवाले से बताया है कि हथियारों से लैस इन उग्रवादियों ने ट्रकों को रोका और  ड्राइवरों को बहुत नजदीके से गोली मार दी।

असम के राज्य पुलिस अधिकारी डी.के.पाठक ने जानकारी दी है कि इन उग्रवादियों ने चार सीमेन्ट कम्पनियों के ट्रकों को जबरन रोका और उसमें सवार 10 कर्मचारियों की हत्या कर दी। इसके बाद ट्रकों को भी आग के हवाले कर दिया।

वहीं, दूसरे मामले में इन विद्रोहियों ने चलती ट्रेन पर हमला करते हुए कंडक्टर की हत्या कर दी। इस घटना में तीन लोग घायल हो गए हैं।

यह हमले गुवाहाटी से 215मील दूर दक्षिण के इलाके में हुआ है, जो कि अलगाववादी संगठन ‘दीमा हालम दाओगाह’ (डीएचडी) का गढ़ माना जाता है। पुलिस का मानना है कि इन ताजा हमलों के पीछ भी इसी गुट का हाथ है।

गत रविवार को भी सेना द्वारा छहः उग्रवादियों की हत्या के जवाब में इस विद्रोही संगठन ने आठ रेल्वे मजदूरों की हत्या कर दी थी।

इस संगठन का कहना है कि उन्होंने 25 मार्च को सेना को युद्ध-विराम की पेशकश दी थी, लेकिन सेना ने उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखी। ‘दीमा हालम दाओगाह’ संगठन के प्रवक्ता फाइफांग दिमसा का कहना है कि, “हमारे दर्जनभर साथी सुरक्षा बल द्वारा मारे गए हैं। इसलिए हमने भी युद्ध विराम की पेशकश को वापस ले लिया है।”

 २६ घंटे का बंद  कार्यसूची तुरन्त बाद उग्रवादियों ने हमला किया। पिछले चार दिनों में इस पहाड़ी जिले में करीबन २५ निर्दोष लोगों को उग्रवादियों ने गोलियां मारकर हत्या की है। इनमें से अधिकतर रेलवे के बोर्डग्रेड निर्माण के साथ जुड़े हुए कर्मचारी और ट्रक ड्राईवर है। ये सभी उग्रवादियों ने हाल में वृद्धि किये हिंसा के कारण सभी विकास के काम लगभग बाधित हो गये हैं।

गौरतलब है कि देश के उत्तर पूर्वी इलाकों में कई विद्रोही संगठन स्वायत्ता हासिल करने के लिए लगातार सिर उठा रहे हैं। इन उग्रवादियों में ज्यादातर म्यांमार और चीन के सीमावर्ती इलाकों से ताल्लुक रखते हैं।
ता है। लेकिन अभी तक इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि सरकार के इस निर्णय से आईएसआई कितना इतिफाक रखता है। हाल ही में राष्ट्र पति परवेज मुशर्रफ और सेना को लोकतांत्रिक सरकार की वजह से पीछे हटना पड़ा है। सीमा पार से गोली बारी, घुसपैठियों को बढ़ावा देना, जो लोग नही चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते में सुधार आये वे इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रहे है। मुखर्जी अपनी यात्रा के दौरान इस्लामाबाद को यह बात समझाये कि सिर्फ कहने से कि हम आतंकवाद का विरोध करते है काम नही चलेगा  बल्कि करके दिखाना होगा। जयपुर बम विस्फोट के पीछे बंग्लादेश के आतंकवादी संगठन हरतक-उल-ये जेहाद का हाथ होने की संभावना बताई जा रही है। नई दिल्ली  को ढाका पर दबाव डालकर आतंकवादियो से निपटने की कोशिश करनी होगी।


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