पिछले बीस पचीस वर्षो से देश में जो आतंकवादी घटनाएं घटने के बजाय लगातार बढती जा रही है, इसके पीछे हमारा नेतृत्व, प्रशासन और आम जनता के अलावा कुछ ऐसे संगठन है जो लगातार इन घटनाओं को अंजाम देने के लिए युवाओं को प्रेरित करते है। अपने पाठकों की जानकारी के लिए उन संगठनों की अब तक की जीवन यात्रा का विवरण देने का विनम्र प्रयास किया जा रहा है। आशा है सुधी पाठक इस को पढ़ने के बाद सोचने पर विवश होंगे कि, ये क्या हो रहा है।
जिन चार प्रमुख आतंकवादी संगठनों का जिक्र किया जा रहा है जिसका उद्देश्य जेहाद के माध्यम से भारत को आर्थिक और सामजिक तौर पर तबाह करके अपनी विचार धारा को स्थापित करने का है। ये संगठन है लश्करे-ये तैयबा जैश -ये मोहम्मद, हरकत-उल जेहाद ई- इस्लामी(हूजी) और सिमी इन चारों संस्थाओं के बारे में आपको संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है।
लश्कर-ये तैयबा
मूल: लश्कर-ये तैयबा का 1980 में अफगानिस्तान में गठन हुआ। लश्कर-ये तैयबा,जमात उद-दवा का राजनीतिक शाखा है। इसका मुख्यालय मुरदिके, लहौर के पास पाकिस्तान में है। प्रो. हफीज मोहम्मद सादिक इसके संगठन कर्ता अमीर है।
कार्य-सूची - भारत में इस्लामिक शासन की स्थापना, पाकिस्तान के आस-पास जितने मुस्लिम देश है उनको एक करना। जम्मू और कश्मीर में सक्रिय है। पूरे भारत में सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन के रूप में कार्यरत है।
अनुयायी – उनके जितने भी अनुयायी है, वे पाकिस्तान और अफगानिस्तान से तालुक रखते है। सुडान, बहरीन, और केन्द्रीय एशिया के मुसलमान भी इसके तरफ झुकाव रखते है। आईएसआई इसको धन और शस्त्र मुहैया कराती है। जम्मू कश्मीर में कम से कम इसके 750 आतंकवादी सक्रिय हैं।
कार्यक्षेत्र – जम्मू कश्मीर के अलावा नई दिल्ली, बंगलोर, मुम्बई, हैदराबाद, वाराणसी, कलकत्ता, और गुजरात में जितने भी आतंकवादी हमले हुए है, कईयों में इसके शामिल होने की पुष्टि हुई है। इसके अतंर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन से सम्बन्ध है। इसके शिविर पाकिस्तान में कार्यरत है। उन शहरों के नाम, शिविर जहां पर अवस्थित है मुजफ्फराबाद, कराची, लहौर , पेशावर, इस्लामाबाद, मुल्तान और क्वेटा।
प्रशिक्षण – उलेमा और अस्त्र-शस्त्र दोनो का प्रशिक्षण मुहैया कराते है। इसके इनको चंदा, पाकिस्तान, ब्रिटेन, इस्लामिक गैर सरकारी संस्था इसके अलावा और सहयोग आईएसआई के द्वारा भी दिया जाता है।
जैश -ये मोहम्मद
मूल: जैश -ये मोहम्मद की स्थापना 31 जनवरी 2000 में पाकिस्तानी मौलाना मसूद अजहर द्वारा कराची में किया गया। मसूद अजहर इंडियन एयर लाइंस विमान संख्या 814 के अपहरण के वजह से भारत की सुरक्षा ऐजेंशियो को छोड़ना पड़ा था। इसको आईएसआई, तालिबान और ओसामा बिन लादेन से सहयोग मिलता है।
अनुयायी – इसके भी ज्यादातर समर्थक अफगानिस्तान और पाकिस्तान से ही संबंध रखते है। ईराक के एक इस्लामिक संस्था से भी इसका गठजोड़ है।, इसके समर्थक फिलीपिन्स और मध्य एशिया देशों में भी है। इसके भारत में प्रतिबंधित संस्था सिमी से भी संबंध है। पाकिस्तान में हूजी लश्कर- ये तैयबा और सुन्नी आतंकवादी संगठनों से भी सहयोग करता है।
उद्देश्य – शक्ति के जरिये भारतीय शासित कश्मीर से भारतीय सेना को हटाना। पाकिस्तान में जेहाद का विद्यालय चलाना। भारतीय सेना द्वारा छोड़े जाने पर अजहर ने कहा था कि कश्मीर को आजाद कराने के अलावा भारत से अयोध्या, अमृतसर और दिल्ली छीन लेगा।
कार्यक्षेत्र –अपना कार्यक्षेत्र कश्मीर में हो सीमित रखा है। बावजूद इसके सदस्य , कश्मीर के बाहर सुरक्षा बलों द्वारा मारे गये है। इसने लश्कर-ये तैयबा के साथ मिलकर संयुक्त रूप से आतंकवादी घटनाओं का अंजाम देना शुरू किया है।
प्रशिक्षण – शस्त्र चलाने के अलावा आत्मघाती बम विस्फोट कैसे किया जाये इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके कार्यकर्ता पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर हमला के दोषी है। अपने कार्यकर्ताओं को इंटरनेट की भी प्रशिक्षण देता है।
हरकत-उल- जिहाद इ- इस्लाम (हूजी)
मूल: हूजी की स्थापना 1980 में पाकिस्तान में इसका मूल उद्देश्य अफगानिस्तान में सोवियत सेनाओं से लड़ना था। पिछले दशकों में इसमें परिवर्तन यह आया है कि इसने अपना कार्यक्षेत्र जम्मू और कश्मीर को बना लिया है। इसकी शाखाएं भारत और बंग्लादेश में भी कार्यरत है। बंग्लादेश इसका दूसरा घर हो गया है। वाराणसी और कलकत्ता के बम विस्फोट के पीछे इसके हाथ होने की संभावना है।
अनुयायी – आजाद कश्मीर, पाकिस्तान, पंजाब, और कराची से आते है. बंग्लादेश के चिटगांव के निवासियो की संख्या सबसे ज्यादा है। कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के लिए देवबंद के मदरसाओं और कश्मीर, भारत के लोग भी इसमें शामिल होते है।
उद्देश्य – भारत की आंतरिक सुरक्षा को तहस-नहस करने के साथ, शक्ति का प्रयोग करके जम्मू और कश्मीर को भारत से अलग- थलग करना। सिमी के साथ गठबंधन।
कार्यक्षेत्र – 1992 हूजी के आतंकवादियों ने जम्मू और कश्मीर में प्रवेश किया। बंग्लादेश के साथ, भारत के उत्तरी पूर्वी सीमा क्षेत्र जम्मू कश्मीर में हूजी हरकत- उल- मुजाहिद्दीन के नाम से संघर्ष करता है। इसके सदस्य अफगानिस्तान में प्रशिक्षण प्राप्त करते है, आईएसआई से मदद मिलता है।
सिमी
मूल - 15 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश में इसकी स्थापना हुई। जमायेते इस्लामी हिंद के सहयोगी संस्था के रूप में कार्य करना शुरू किया। इसके राष्ट्रीय महासचिव सफदर नागोरी और 12 अन्य नेताओं को इंदौर के पास आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चलाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया। साथ ही साथ देश में हो रही आतंकवादी घटनाओं पर भी इनका हाथ था। आपको जानकर आश्चर्य होगा यह सिमी भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित है।
अनुयायी – इसके 400 पूर्णकालिक कार्यकर्ता , 20,000 से ज्यादा इसके साधारण सदस्य हैं। विद्यालय के बच्चे पर भी ये ध्यान केन्द्रित करते है।
उद्देश्य – इस्लाम में जिहाद को स्थापित करना, शरियत पर आधारित इस्लामिक राज्य की स्थापना, भारत के संविधान में बिल्कुल आस्था नही है। गैर इस्लामिक रीति रिवाजो का विरोध। हाल ही में आतंकवादी संगठन लश्कर-ये तैयबा, जैश- ये मोहम्मद और हूजी के पैदल सैनिक तौर पर उभरे है. यानी ये संगठन इन्हीं को आगे रखकर देश में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे रहे है।
कार्यक्षेत्र –सिमी का आतंकवादी संगठन से गहरा सम्बन्ध है। जहां पर ये सक्रिय है, देश में सम्प्रदायिक तनाव फैलान में लगे रहना इनकी पहली प्राथमिकता है। यू.पी, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश असम और केरल में पूरी तरह से उभर कर सामने आये हैं।